भारत की पहली पूर्णत पेपरलेस राज्य न्यायपालिका

संदर्भ:
हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्य कांत ने सिक्किम को देश की पहली पूर्णतः पेपरलेस न्यायपालिका घोषित किया। गंगटोक में आयोजित ‘प्रौद्योगिकी और न्यायिक शिक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन’ के दौरान की गई यह ऐतिहासिक घोषणा भारतीय न्यायिक प्रणाली के आधुनिकीकरण में एक मील का पत्थर है।
पेपरलेस न्यायपालिका क्या है?
एक पूर्णतः पेपरलेस न्यायपालिका वह प्रणाली है जिसमें मामले की फाइलिंग से लेकर अंतिम निर्णय तक की सभी न्यायिक प्रक्रियाएं भौतिक कागज के बजाय इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से संचालित होती हैं। इसमें ई-फाइलिंग, डिजिटल केस रिकॉर्ड, वर्चुअल सुनवाई और इलेक्ट्रॉनिक केस ट्रैकिंग जैसी प्रणालियां शामिल हैं।
मुख्य उद्देश्य:
- न्याय तक सुलभ पहुंच: सिक्किम जैसे कठिन भौगोलिक और पहाड़ी क्षेत्रों में वादियों के लिए लंबी यात्रा की बाधा को समाप्त करना।
- न्यायिक विलंब में कमी: भौतिक फाइलों के रखरखाव और स्थानांतरण में लगने वाले समय को बचाकर मामलों का त्वरित निपटारा करना।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना ताकि रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की गुंजाइश न रहे।
- ग्रीन गवर्नेंस: कागज के उपयोग को कम करके पर्यावरण संरक्षण (Sustainable Development) को बढ़ावा देना।
प्रमुख विशेषताएं:
- एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण: उच्च न्यायालय से लेकर जिला अदालतों तक पूरी प्रक्रिया अब 100% डिजिटल है।
- ई-कोर्ट्स मिशन मोड प्रोजेक्ट (चरण-III): इस उपलब्धि को राष्ट्रीय ई-कोर्ट्स परियोजना के आधुनिक तकनीकी ढांचे के तहत हासिल किया गया है।
- एआई (AI) उपकरणों का एकीकरण: सिक्किम न्यायपालिका शोध के लिए SUPACE (सुप्रीम कोर्ट पोर्टल फॉर असिस्टेंस इन कोर्ट्स एफिशिएंसी) और अनुवाद के लिए SUVAS (सुप्रीम कोर्ट विधिक अनुवाद सॉफ्टवेयर) जैसे उन्नत एआई उपकरणों का उपयोग कर रही है।
- डिजिटल हाईवे: सीजेआई के अनुसार, अब नागरिक ‘डिजिटल हाईवे’ के माध्यम से सीधे विभिन्न न्यायिक मंचों से जुड़े हैं, जिससे दूरी किलोमीटर में नहीं बल्कि डिजिटल पहुंच में मापी जाती है।
महत्व:
- संवैधानिक अधिकारों का सुदृढ़ीकरण: यह पहल अनुच्छेद 21 (त्वरित सुनवाई का अधिकार) और अनुच्छेद 39A (समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता) के संवैधानिक आदेशों को प्रभावी रूप से लागू करती है। तकनीक अब न्याय की राह में दूरी और लागत को कम करने का मुख्य साधन बन गई है।
- दक्षता और पारदर्शिता: डिजिटल केस मैनेजमेंट सिस्टम (DCMS) जजों को वास्तविक समय में डेटा तक पहुंच प्रदान करता है, जिससे ‘लंबित मामलों के बोझ’ (Judicial Pendency) को कम करने में मदद मिलती है।
- समावेशी न्याय प्रणाली: जैसा कि मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने उल्लेख किया, यह कदम न्याय वितरण को अधिक समावेशी (Inclusive) बनाता है, विशेष रूप से समाज के उन वर्गों के लिए जो दुर्गम क्षेत्रों में रहते हैं।
- भविष्य का मॉडल: सिक्किम का यह सफल मॉडल अन्य भारतीय राज्यों और ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के लिए एक ब्लूप्रिंट के रूप में कार्य करेगा।