वन्दे मातरम् को राष्ट्रगान के समान कानूनी दर्जा

संदर्भ:
हाल ही में वन्दे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ (2025-2026) के ऐतिहासिक अवसर पर भारत सरकार ने इसे राष्ट्रगान (जन-गण-मन) के समान कानूनी दर्जा प्रदान करने वाले राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के मुख्य बिंदु:
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (The Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) भारत का एक प्रमुख केंद्रीय कानून है, जिसे राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा और सम्मान की रक्षा के लिए बनाया गया है।
यह अधिनियम पूरे भारत में प्रभावी है और मुख्य रूप से तीन राष्ट्रीय प्रतीकों—राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा), भारत का संविधान, और राष्ट्रगान के अपमान को अपराध मानता है:
- धारा 2 (राष्ट्रीय ध्वज और संविधान का अपमान): इसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर तिरंगे या संविधान को जलाना, विकृत करना, दूषित करना, नष्ट करना या पैरों से कुचलना दंडनीय है।
- अपमान की श्रेणी: ध्वज को कमर के नीचे कपड़े के रूप में पहनना, कुशन या रूमाल पर छपवाना, जानबूझकर भगवा पट्टी को नीचे रखना, या झंडे को जमीन से छूने देना अपमान माना जाता है।
- अपवाद: संविधान की आलोचना या संशोधन के लिए शांतिपूर्ण प्रयास इस धारा के तहत अपराध नहीं हैं।
- धारा 3 (राष्ट्रगान में बाधा): यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान गाने से रोकता है या गाती हुई सभा में बाधा डालता है, तो वह दोषी माना जाएगा।
- न्यायिक स्पष्टीकरण: सर्वोच्च न्यायालय (Bijoe Emmanuel Case) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रगान नहीं गाता लेकिन सम्मान में चुपचाप खड़ा रहता है, तो वह इस अधिनियम का उल्लंघन नहीं है।
- धारा 3A (कठोर दंड): दूसरी बार या बार-बार अपराध करने पर कम से कम एक वर्ष की कैद का प्रावधान है।
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इस अधिनियम के तहत किसी भी प्रकार का अपमान सिद्ध होने पर निम्नलिखित सजा हो सकती है: कारावास: अधिकतम 3 वर्ष तक की जेल। जुर्माना: आर्थिक दंड या जेल और जुर्माना दोनों।
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अन्य संबंधित नए दिशानिर्देश:
गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी नवीनतम प्रोटोकॉल के अनुसार, निम्नलिखित प्रमुख बदलाव किए गए हैं:
- सभी 6 अंतरा अनिवार्य: अब तक केवल पहले दो अंतरा ही आधिकारिक तौर पर गाए जाते थे, लेकिन अब सभी छह अंतरा का गायन अनिवार्य कर दिया गया है।
- गायन का समय: पूरे गीत की अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड (190 सेकंड) निर्धारित की गई है।
- वरीयता क्रम: आधिकारिक कार्यक्रमों में वन्दे मातरम् का गायन राष्ट्रगान से पहले किया जाएगा।
- सम्मान की स्थिति: गीत के दौरान सभी को सावधान की मुद्रा (Attention) में खड़ा होना होगा।
संवैधानिक एवं विधिक स्थिति:
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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि |
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में रचित। 1882 के उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा। |
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संविधान सभा का निर्णय |
24 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसे राष्ट्रगान के समान सम्मान देने की घोषणा की थी। |
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प्रस्तावित संशोधन |
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 में संशोधन का प्रस्ताव है। |
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दंड का प्रावधान |
गीत का अपमान या व्यवधान डालने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। |
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सर्वोच्च न्यायालय का रुख |
मार्च 2026 में न्यायालय ने MHA की एडवाइजरी को वैध माना, लेकिन स्पष्ट किया कि यह अंतरात्मा की स्वतंत्रता के विरुद्ध बाध्यकारी नहीं होनी चाहिए। |