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बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप

Measles outbreak in Bangladesh

संदर्भ:

बांग्लादेश इस समय दशकों के सबसे भीषण खसरा (Measles) प्रकोप का सामना कर रहा है, जिसने देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को गंभीर संकट में डाल दिया है। मार्च 2026 के मध्य से शुरू हुए इस प्रकोप में अब तक 336 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है और 50,000 से अधिक संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं।

प्रकोप की वर्तमान स्थिति:

  • व्यापक प्रसार: यह संक्रमण बांग्लादेश के सभी 8 विभागों और 64 में से 58 जिलों (91% क्षेत्र) में फैल चुका है।
  • मृत्यु दर और प्रभावित आयु वर्ग: मरने वालों में 79% से अधिक बच्चे 5 वर्ष से कम आयु के हैं। ढाका, राजशाही, और चटगाँव जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हैं।
  • अस्पतालों पर दबाव: अकेले पिछले डेढ़ महीने में 31,000 से अधिक बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। 4 मई 2026 को एक ही दिन में 17 बच्चों की मौत दर्ज की गई, जो इस प्रकोप का अब तक का सबसे दुखद आंकड़ा है।

संकट के मुख्य कारण:

  • टीकाकरण अंतराल (Vaccination Gaps): 2024 की राजनीतिक उथल-पुथल के कारण नियमित टीकाकरण अभियान बाधित हुआ। 2024 में होने वाला ‘Measles-Rubella (MR) Campaign’ टल गया, जिससे ‘हर्ड इम्युनिटी’ (Herd Immunity) का स्तर गिर गया।
  • खरीद नीति में बदलाव (Procurement Shift): UNICEF के अनुसार, बांग्लादेश ने टीका खरीद की प्रक्रिया को यूनिसेफ समर्थित प्रणाली से हटाकर ‘ओपन टेंडर’ में बदल दिया, जिससे टीकों की आपूर्ति में भारी देरी और कमी (Stock-out) हुई।
  • विटामिन-A की कमी: 2025 में विटामिन-A सप्लीमेंटेशन के दो राउंड में से केवल एक ही पूरा हो सका, जिससे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हुई।
  • शरणार्थी संकट: संक्रमण की शुरुआत जनवरी 2026 में म्यांमार सीमा के पास रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों से हुई, जहाँ घनी आबादी के कारण वायरस तेजी से फैला।

सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की प्रतिक्रिया:

  • आपातकालीन टीकाकरण: 5 अप्रैल 2026 से एक मेगा अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत 6 महीने से 5 वर्ष तक के 1.2 मिलियन बच्चों को लक्षित किया गया है।
  • आयु सीमा में छूट: विशेष परिस्थिति में टीकाकरण की न्यूनतम आयु को 9 महीने से घटाकर 6 महीने कर दिया गया है ताकि नवजात शिशुओं को बचाया जा सके।
  • ढांचागत सहायता: ढाका मेडिकल कॉलेज में सेना द्वारा फील्ड अस्पताल स्थापित किए गए हैं। 

भारत के लिए चेतावनी:

WHO ने चेतावनी दी है कि म्यांमार और भारत जैसे पड़ोसी देशों में भी इस संक्रमण के फैलने का जोखिम है। भारत को अपनी सीमावर्ती क्षेत्रों में ‘इम्युनिटी गैप’ को भरने और निगरानी (Surveillance) को मजबूत करने की आवश्यकता है।

खसरा के बारे में:

  • प्रकार: खसरा (Measles), जिसे ‘रूबियोला’ भी कहा जाता है, एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है जो मुख्य रूप से बच्चों के श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है। 
  • कारक (Pathogen): यह ‘मोरबिलीवायरस’ (Morbillivirus) वंश के RNA वायरस (पैरामिक्सोवायरस परिवार) के कारण होता है।
  • संचरण (Transmission): यह एक वायुजनित (Airborne) रोग है जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों (Droplets) के माध्यम से फैलता है। यह वायरस हवा में 2 घंटे तक जीवित रह सकता है और इसकी संक्रामकता दर लगभग 90% है।
  • लक्षण: शुरुआत में तेज़ बुखार, खांसी, बहती नाक और आँखों का लाल होना जैसे लक्षण दिखते हैं। इसकी एक विशिष्ट पहचान कोप्लिक धब्बे (Koplik spots) हैं—मुँह के अंदर छोटे सफेद धब्बे। इसके बाद चेहरे से शुरू होकर पूरे शरीर पर लाल चकत्ते (Rash) फैल जाते हैं।
  • जटिलताएँ (Complications): गंभीर मामलों में यह निमोनिया, दस्त, अंधापन, और एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क में सूजन) का कारण बन सकता है, जो जानलेवा हो सकता है। 
  • इलाज: खसरे (Measles) का सबसे प्रभावी इलाज और बचाव एमएमआर (MMR – खसरा, कण्ठमाला, रूबेला) वैक्सीन है, जो 97% तक सुरक्षा प्रदान करता है। यह टीका वायरस से लड़ने के लिए शरीर में एंटीबॉडी बनाता है।

भारत का लक्ष्य:

भारत सरकार ने 2026 तक खसरा और रूबेला (Measles-Rubella) के उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) के तहत MR (खसरा-रूबेला) वैक्सीन की दो खुराकें (9-12 महीने और 16-24 महीने) मुफ्त दी जाती हैं। हाल ही में सरकार ने इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राष्ट्रीय ‘ज़ीरो खसरा-रूबेला’ उन्मूलन अभियान 2025-26 भी शुरू किया है।

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