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डी. एरिंग मेमोरियल वन्यजीव अभयारण्य

डी. एरिंग मेमोरियल वन्यजीव अभयारण्य

D. Ering Memorial Wildlife Sanctuary

संदर्भ:

हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के डी’इरिंग मेमोरियल वन्यजीव अभयारण्य (D’Ering Memorial Wildlife Sanctuary – DEMWS) में लगभग दो दशकों (20 साल) के बाद रॉयल बंगाल टाइगर की उपस्थिति दर्ज की गई।

डी’इरिंग मेमोरियल वन्यजीव अभयारण्य (D’Ering Memorial Wildlife Sanctuary – DEMWS):

  • अवस्थिति: यह अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग (East Siang) जिले में पासीघाट से लगभग 13 किमी दूर स्थित है।
  • क्षेत्रफल: अभयारण्य लगभग 190 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • स्थापना: इसकी स्थापना वर्ष 1976 में हुई थी। प्रारंभ में इसे ‘लाली वन्यजीव अभयारण्य’ (Lali Wildlife Sanctuary) के रूप में जाना जाता था।
  • नामकरण: वर्ष 1986 में, इसका नाम बदलकर अरुणाचल प्रदेश के प्रसिद्ध राजनेता और ‘इरिंग आयोग’ के अध्यक्ष दार्इंग इरिंग (Daying Ering) के सम्मान में ‘डी’इरिंग मेमोरियल वन्यजीव अभयारण्य’ कर दिया गया। [
  • नदी द्वीप पारिस्थितिकी तंत्र: यह अभयारण्य सियांग नदी (ब्रह्मपुत्र) और उसकी सहायक नदी सिब्या (Sibya) के बीच स्थित है। यह मुख्य रूप से नदी द्वीपों (River Islands) का एक समूह है, जो इसे एक अद्वितीय जलीय और स्थलीय संगम प्रदान करता है।
  • जलवायु: यहाँ की जलवायु उष्णकटिबंधीय (Tropical) है और यहाँ उत्तर-पूर्वी तथा दक्षिण-पश्चिमी दोनों मानसून से भारी वर्षा होती है। 
  • घास के मैदान: अभयारण्य का लगभग 75-80% हिस्सा घास के मैदानों और छप्पर (Thatch) से ढका हुआ है।
  • वन प्रकार: शेष 20% क्षेत्र में नदी तटीय वन (Riverine Forests), बांस के झुरमुट और मिश्रित पर्णपाती वन पाए जाते हैं。
  • प्रमुख वृक्ष प्रजातियां: यहाँ Terminalia myriocarpa (होलॉक), Dillenia indica (चलता), Albizia spp., और Bombax ceiba (सेमल) जैसे वृक्ष बिखरे हुए पैच में पाए जाते हैं। 
  • स्तनधारी: बाघ और तेंदुए के अलावा यहाँ जंगली भैंसा (Asiatic Buffalo), एशियाई हाथी, हॉग डियर, जंगली सूअर, सांबर और बार्किंग डियर प्रमुखता से पाए जाते हैं। यहाँ दुर्लभ हिस्पिड हेयर और चीनी पैंगोलिन भी देखे गए हैं।
  • जलीय जीव: सियांग नदी के कारण यहाँ गंगा डॉल्फिन (Gangetic Dolphin) और विभिन्न प्रकार की स्थानिक मछलियाँ पाई जाती हैं।
  • निवासी और प्रवासी पक्षी: सर्दियों के दौरान (सितंबर से फरवरी) यहाँ साइबेरिया और मंगोलिया से बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी जैसे बत्तख, सारस और वाटरफॉवल आते हैं।
  • लुप्तप्राय पक्षी: यह दुनिया के सबसे दुर्लभ घास के मैदान वाले पक्षियों में से एक, बंगाल फ्लोरिकन (Bengal Florican) का प्रमुख प्रजनन स्थल है। इसके अलावा यहाँ सफेद पंखों वाली लकड़ी की बत्तख भी पाई जाती है।

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