डाई-अमोनियम फॉस्फेट

संदर्भ:
द फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स त्रावणकोर लिमिटेड (FACT) ने केरल स्थित उद्योगमंडल (Udyogamandal) संयंत्र में डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया।
डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) के बारे में:
- परिचय: डाई अमोनियम फास्फेट (DAP) दुनिया भर में सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला फास्फोरस उर्वरक है।
- पोषक तत्व अनुपात: DAP में मानक 18% नाइट्रोजन (N) और 46% फॉस्फोरस (P₂O₅) होता है (18:46:0 का अनुपात)। इसमें पोटेशियम (K) नहीं होता।
- जल में घुलनशीलता: यह पानी में अत्यधिक घुलनशील है, जिससे मिट्टी में मिलते ही यह पौधों को तुरंत फॉस्फेट और अमोनियम आयन प्रदान करता है।
- मृदा प्रभाव: प्रारंभिक चरण में इसके दाने के आसपास का माध्यम क्षारीय (Alkaline pH 7.5–8) हो जाता है। हालांकि, लंबे समय में नाइट्रीकरण के कारण मिट्टी आंशिक रूप से अम्लीय हो जाती है।
- बेसल डोज (Basal Dose): फॉस्फोरस मिट्टी में स्थिर (Immobile) रहता है। इसलिए, किसान फसलों (जैसे गेहूं, सरसों) की बुवाई के समय इसे बीजों के ठीक नीचे या पास डालते हैं।
- वानस्पतिक और जड़ों का विकास: यह पौधों की प्रारंभिक अवस्था में मजबूत जड़ों के निर्माण और कोशिका विभाजन के लिए अनिवार्य है। इसके बिना फसलें सामान्य आकार नहीं ले पातीं।
- दलहनी फसलों के लिए आदर्श: दालों को कम नाइट्रोजन और अधिक फॉस्फोरस की आवश्यकता होती है, जिसके लिए DAP सर्वोत्तम स्टार्टर माना जाता है।
- उत्पादन: यह नियंत्रित परिस्थितियों में अमोनिया (Ammonia) और फॉस्फोरिक एसिड (Phosphoric Acid) की प्रतिक्रिया से तैयार होता है।
- अग्निशामक (Fire Retardant): जंगलों की आग को रोकने के लिए इसका छिड़काव किया जाता है; यह दहन तापमान को कम कर ईंधन की उपलब्धता घटाता है।
- औद्योगिक प्रक्रिया: धातु परिष्करण (Metal Finishing) और सोल्डरिंग (Soldering Flux) में।
- खाद्य उद्योग: वाइन और मीड (Mead) निर्माण में खमीर (Yeast) के पोषण के लिए और पनीर कल्चर तैयार करने में।
भारत की आयात निर्भरता:
- तीव्र निर्भरता: भारत फॉस्फेटिक उर्वरकों के मामले में 50-60% आयात पर निर्भर है। घरेलू स्तर पर रॉक फॉस्फेट और फॉस्फोरिक एसिड के भंडार अत्यंत सीमित हैं।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान:
- चीन का निर्यात प्रतिबंध: पूर्व में सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहे चीन द्वारा घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निर्यात को रोके जाने से भारत में संकट बढ़ा है।
- मध्य पूर्व और लाल सागर संकट: भू-राजनीतिक तनावों के कारण सल्फर आपूर्ति बाधित हुई है और माल ढुलाई (Freight) लागत बढ़ने से वैश्विक निविदाओं में आयात मूल्य रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं।
- द्विपक्षीय समझौते: भारत ने आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सऊदी अरब (31 लाख टन), रूस (30.10 लाख टन), और मोरक्को (25 लाख टन) के साथ दीर्घकालिक समझौतों (Long-Term Agreements) पर हस्ताक्षर किए हैं।
सब्सिडी ढांचा:
- पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS): यूरिया (जिसका MRP नियंत्रित है) के विपरीत, DAP को NBS योजना (2010 से प्रभावी) के तहत कवर किया जाता है।
- सरकार प्रति किलोग्राम पोषक तत्व (P और N) पर एक निश्चित सब्सिडी वार्षिक आधार पर तय करती है।
- राजकोषीय दबाव: अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल आने पर सरकार को किसानों को ₹1,350 प्रति बैग की अनौपचारिक रियायती दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए ‘विशेष पैकेज’ और अतिरिक्त सब्सिडी देनी पड़ती है, जिससे सरकारी खजाने (Fiscal Deficit) पर भारी दबाव पड़ता है।