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158 वर्षो बाद सायनैंथस हूकेरी की पुनःखोज

158 वर्षो बाद सायनैंथस हूकेरी की पुनःखोज

Saussurea Hookeri Rediscovery

संदर्भ:

भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) के वैज्ञानिकों ने पूर्वी हिमालय जैव विविधता हॉटस्पॉट के तहत आने वाले अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में ‘सायनैंथस हूकेरी’ (Cyananthus hookeri) नामक दुर्लभ अल्पाइन पौधे को 158 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद सफलतापूर्वक पुनः खोजा।

सायनैंथस हूकेरी प्रजाति के बारे में:

  • पृष्ठभूमि: यह अति-दुर्लभ अल्पाइन फूल भारत में अंतिम बार वर्ष 1867 में प्रसिद्ध ब्रिटिश वनस्पतिशास्त्री सर जोसेफ डाल्टन हूकर द्वारा सिक्किम में देखा और प्रलेखित किया गया था। 
  • वर्गीकरण: यह पौधा मुख्य रूप से बेलफ्लावर (Bellflower) परिवार यानी ‘कैम्पैनुलेसी’ (Campanulaceae) से संबंधित है।
  • भौतिक रूप: यह एक अत्यंत छोटा, बौना और गुच्छेदार रूप में उगने वाला अल्पाइन शाक (Dwarf, tuft-forming alpine herb) है। इसके फूल आकर्षक बैंगनी-नीले (Purple-blue) रंग के होते हैं।
  • पर्यावास: यह प्रजाति अत्यधिक ऊंचाई वाले (लगभग 3,600 मीटर) नाजुक पर्वतीय घास के मैदानों और पथरीली ढलानों (Alpine meadows and rocky slopes) पर जीवित रहने के लिए अनुकूलित है।
    • वैश्विक स्तर पर यह नेपाल, भूटान, चीन और तिब्बत के सिनो-हिमालयी क्षेत्रों में भी पाई जाती है। 
  • संरक्षण स्थिति: वैज्ञानिक सर्वेक्षण के दौरान भारत में इस प्रजाति के 50 से भी कम परिपक्व पौधे जंगली अवस्था में जीवित पाए गए।
    • इस अत्यंत सीमित जनसंख्या और संकीर्ण भौगोलिक वितरण के कारण शोधकर्ताओं ने आईयूसीएन (IUCN) रेड लिस्ट मानदंडों के तहत इसे राष्ट्रीय स्तर पर ‘विलुप्तप्राय’ (Endangered – EN) श्रेणी में वर्गीकृत करने की दृढ़ सिफारिश की है। 
  • खतरा: जलवायु परिवर्तन, वैश्विक तापमान में वृद्धि (Global Warming) और उच्च-ऊंचाई वाले हिमालयी इकोसिस्टम में मानवीय हस्तक्षेप इसके अस्तित्व के लिए सबसे गंभीर खतरे हैं।

भारत (पूर्वी हिमालय) में पाई जाने वाली अन्य दुर्लभ पादप प्रजातियाँ:

  • सैप्रिया हिमालयाना (Sapria himalayana): यह ईगलनैस्ट वन्यजीव अभयारण्य में पाई जाने वाली एक अत्यंत दुर्लभ, लुप्तप्राय और पूरी तरह से परजीवी (Parasitic) पादप प्रजाति है, जिसके फूल बड़े और विशिष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
  • इम्पेशेंस राजीबियाना (Impatiens rajibiana): भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) द्वारा पश्चिम कामेंग के शेरगांव के जंगलों से खोजी गई बालसम (Balsam) की एक सर्वथा नई और स्थानिक (Endemic) प्रजाति है। 
  • क्रेपिडियम पारिया (Crepidium parryae): मिशमी पहाड़ियों (Mishmi Hills) में लगभग एक सदी (100 वर्ष) के बाद खोजी गई एक दुर्लभ ऑर्किड प्रजाति है, जिसे पहले विलुप्त मान लिया गया था।
  • हाइमेनिडियम एमाबाइल (Hymenidium amabile): एपिएसी (Apiaceae) परिवार का यह दुर्लभ औषधीय पौधा हाल ही में तवांग के लागांग त्सो झील के पास 4,654 मीटर की ऊंचाई पर 100 से अधिक वर्षों बाद फिर से खोजा गया है। 
  • बेगोनिया न्यीशियोरम (Begonia nyishiorum): दिबांग घाटी से खोजी गई फूलों के पौधे की एक नई अनूठी प्रजाति, जिसका नामकरण अरुणाचल की स्थानीय ‘न्यीशी जनजाति’ के प्रकृति संरक्षण के प्रति योगदान को सम्मान देने के लिए किया गया है। 

FAQs: 

1. Cyananthus hookeri क्या है?

यह कैम्पैनुलेसी (बेलफ्लावर) परिवार का बैंगनी-नीले फूलों वाला एक अत्यंत दुर्लभ अल्पाइन शाकीय पौधा है।

2. इसकी पुनःखोज कहाँ हुई?

इसकी पुनःखोज अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में स्थित चुना घाटी (3,600 मीटर ऊंचाई) में हुई।

3. यह प्रजाति 158 वर्षों तक क्यों नहीं मिली?

अत्यधिक दुर्गम भौगोलिक सीमांत क्षेत्रों, अल्पाइन बर्फबारी और लक्षित वनस्पति सर्वेक्षणों की कमी के कारण यह ओझल रहा।

4. इस खोज का वैज्ञानिक महत्व क्या है?

यह पूर्वी हिमालय की अज्ञात पादप विविधता को प्रलेखित करने और टैक्सोनॉमी अनुसंधान को समृद्ध करने में सहायक है।

5. क्या यह पौधा विलुप्तप्राय श्रेणी में आता है?

हाँ, अत्यंत सीमित संख्या (50 से कम पौधे) के कारण इसे Endangered (विलुप्तप्राय) श्रेणी में रखने की सिफारिश है। 

6. इसकी प्रमुख विशेषताएं क्या हैं?

यह ठंडी, पथरीली ढलानों पर उगने वाला बौना, गुच्छेदार शाक है जिसके फूल बैंगनी-नीले होते हैं।

7. इस खोज से जैव विविधता संरक्षण को क्या लाभ होगा?

यह नाजुक उच्च-ऊंचाई वाले हिमालयी इकोसिस्टम और इन-सिटु (In-situ) पादप संरक्षण नीतियों को मजबूत करेगा।

8. खोज किस वैज्ञानिक दल ने की?

यह खोज भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) के शुभजीत लाहिड़ी, मोनालिसा दास और डॉ. एस.एस. दश की टीम ने की। 

9. यह पौधा किस क्षेत्र में पाया जाता है?

भारत (अरुणाचल, सिक्किम) के अलावा यह नेपाल, भूटान, चीन और तिब्बत के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मिलता है।

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