भारत ने फिलिस्तीन की UN पूर्ण सदस्यता का किया समर्थन
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संदर्भ:
हाल ही में ब्रुसेल्स में आयोजित ‘फिलिस्तीन डोनर ग्रुप’ (Palestine Donor Group) की मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत ने फिलिस्तीन की संयुक्त राष्ट्र [Palestine UN Membership] की पूर्ण सदस्यता का समर्थन किया।
फिलिस्तीन (Palestine Statehood) के बारे में:
- भू-राजनीतिक स्थिति: फ़िलिस्तीन (Palestine) पश्चिम एशिया के लेवांत क्षेत्र में स्थित एक आंशिक रूप से मान्यता प्राप्त देश है।
- वर्तमान में फिलिस्तीन दो अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में विभाजित है—वेस्ट बैंक (West Bank) (फतह गुट द्वारा प्रशासित) और गाजा पट्टी (Gaza Strip) (हमास के नियंत्रण में)।
- यरुशलम (Jerusalem) दोनों पक्षों के बीच सबसे विवादित धार्मिक और राजनीतिक केंद्र है।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: प्रथम विश्वयुद्ध के बाद ऑटोमन साम्राज्य के पतन के बाद यह क्षेत्र ब्रिटिश शासनादेश (British Mandate) के अधीन आया।
- वर्ष 1947 में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने इस भूमि को यहूदी और अरब राज्यों में विभाजित करने का प्रस्ताव (प्रस्ताव 181) रखा, जिससे 1948 में इजराइल का जन्म हुआ, परंतु फिलिस्तीनी राज्य का मुद्दा अनसुलझा रहा। इसी के चलते इजराइल और फिलिस्तीन के बीच संबंध अच्छे नहीं है।
- वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy): वर्तमान में फिलिस्तीन संयुक्त राष्ट्र का पूर्ण सदस्य नहीं है।
- वर्ष 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा [UN General Assembly] ने फिलिस्तीन को ‘गैर-सदस्य पर्यवेक्षक राज्य’ (Non-member Observer State) का दर्जा दिया था।
- पूर्ण सदस्यता प्राप्त करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की सिफारिश और महासभा के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।
- मानवीय संकट और चुनौतियाँ: गाजा संघर्ष के कारण क्षेत्र में अभूतपूर्व मानवीय संकट पैदा हो गया है। बुनियादी ढांचे का विनाश, विस्थापन और खाद्य असुरक्षा ने वैश्विक समुदाय को तत्काल हस्तक्षेप करने और वित्तीय मदद बढ़ाने के लिए मजबूर किया है।
भारत की फिलिस्तीन नीति:
- ऐतिहासिक एकजुटता (Historical Solidarity): भारत की विदेश नीति [India Foreign Policy] पारंपरिक रूप से फिलिस्तीन समर्थक रही है।
- भारत 1974 में फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) को फिलिस्तीनी लोगों का एकमात्र कानूनी प्रतिनिधि मानने वाला पहला गैर-अरब देश था।
- इसके बाद, 1988 में भारत ने फिलिस्तीन राज्य को पूर्ण राजनयिक मान्यता दी।
- संतुलनकारी कूटनीति (De-hyphenation Policy): वर्ष 1992 में इजराइल के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने के बाद, भारत ने अपनी ‘डी-हाइफनेशन’ नीति अपनाई।
- इसका अर्थ है कि भारत के इजराइल के साथ बढ़ते रक्षा, कूटनीतिक और तकनीकी संबंध, फिलिस्तीन के प्रति उसके ऐतिहासिक और नैतिक समर्थन को प्रभावित नहीं करते हैं।
- दोनों देशों के साथ संबंध स्वतंत्र रूप से संचालित होते हैं।
- दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution): भारत आधिकारिक रूप से एक ऐसे संप्रभु और स्वतंत्र फिलिस्तीन राज्य का समर्थन करता है, जो सुरक्षित और पारस्परिक रूप से मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर इजराइल के साथ शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रह सके।
- भारत ने संयुक्त राष्ट्र मतदान [India UN Vote] में हमेशा इस रुख को बनाए रखा है।
- मानवीय सहायता: भारत जमीनी स्तर पर भी फिलिस्तीन की मदद करता है।
- भारत सरकार स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में मांग-आधारित परियोजनाएं (जैसे रामल्लाह में सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल और टेक्नो पार्क) चला रही है।
- इसके अलावा, भारत संयुक्त राष्ट्र राहत और निर्माण एजेंसी (UNRWA) को निरंतर वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
FAQs:
Q1. भारत ने फिलिस्तीन की UN सदस्यता का समर्थन क्यों किया?
Ans: भारत ऐतिहासिक रूप से न्यायसंगत और शांतिपूर्ण दो-राष्ट्र समाधान [Two-State Solution] के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
Q2. फिलिस्तीन की पूर्ण UN सदस्यता का क्या अर्थ है?
Ans: इसका अर्थ है कि फिलिस्तीन को संयुक्त राष्ट्र [UN Membership] में मतदान का संप्रभु अधिकार प्राप्त होगा।
Q3. भारत की फिलिस्तीन नीति क्या है?
Ans: भारत इजराइल से स्वतंत्र होकर फिलिस्तीन के वैध राष्ट्रीय आकांक्षाओं का निरंतर समर्थन करता है।
Q4. क्या फिलिस्तीन अभी UN का पूर्ण सदस्य है?
Ans: नहीं, फिलिस्तीन वर्तमान में केवल एक ‘गैर-सदस्य पर्यवेक्षक राज्य’ [Non-member Observer State] है।
Q5. इस फैसले का वैश्विक महत्व क्या है?
Ans: यह पश्चिम एशिया में स्थायी शांति, स्थिरता और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था स्थापित करने में सहायक है।
