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उदयपुर में दिखा दुर्लभ लौडांकिया वाइन स्नेक 

उदयपुर में दिखा दुर्लभ लौडांकिया वाइन स्नेक 

Loudankia Vine Snake

संदर्भ:

हाल ही में राजस्थान के उदयपुर स्थित प्रसिद्ध उबेश्वर वन्यजीव क्षेत्र (Ubeshwar Wildlife Area) में तीन दशकों (30 वर्ष) के लंबे अंतराल के बाद अत्यंत दुर्लभ ‘लौडांकिया वाइन स्नेक’ [Loudankia Vine Snake] का आधिकारिक दस्तावेजीकरण किया गया।

लौडांकिया वाइन स्नेक के बारे में:

  • वैज्ञानिक नाम व परिवार: इस जीव का वैज्ञानिक नाम अहेतुल्ला लौडांकिया (Ahaetulla laudankia) है, जो ‘कोलब्रिडे’ (Colubridae) परिवार से संबंधित है।
  • नाम की उत्पत्ति: इसका नाम ओडिया भाषा के शब्द ‘लौडांका’ (Laudanka) से लिया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ “लौकी का सूखा तना” होता है। यह सांप अपने पतले शरीर और विशिष्ट रंग के कारण सूखे तने जैसा दिखता है। 
  • खोज का इतिहास: इस प्रजाति का पहला आधिकारिक वैज्ञानिक वर्णन वर्ष 2019 में किया गया था, जो इसे सरीसृप विज्ञान (Herpetology) में तुलनात्मक रूप से एक नया स्थान देता है।
  • रंग और प्रतिरूप: इसका शरीर मुख्य रूप से चेस्टनट-भूरा (Chestnut-brown) होता है, जिस पर बारीक काले रंग के धब्बे बने होते हैं।
    • इसके सिर के निचले भाग पर मौजूद हल्के सफेद रंग के पैच इसकी सबसे विशिष्ट पहचान हैं। 
  • शारीरिक बनावट: इसकी चोंच या थूथन लंबी और नुकीली होती है, आंखें बड़ी होती हैं तथा पुतलियां क्षैतिज (Horizontal Pupils) होती हैं, जो इसे पेड़ों की टहनियों के बीच उत्कृष्ट द्विनेत्री दृष्टि (Binocular Vision) प्रदान करती हैं।
  • आकार: एक पूर्ण वयस्क लौडांकिया वाइन स्नेक की लंबाई सामान्यतः 80 सेंटीमीटर से लेकर 1.5 मीटर तक होती है। 
  • स्थानिक प्रजाति (Endemic Status): यह पूरी तरह से भारत की स्थानिक प्रजाति है, अर्थात यह प्राकृतिक रूप से केवल भारतीय उपमहाद्वीप में ही पाई जाती है।
    • इसका भौगोलिक दायरा पूर्वी घाट (Eastern Ghats) से शुरू होकर मध्य भारत के जंगलों से गुजरते हुए पश्चिमी भारत में पूर्वी राजस्थान तक फैला हुआ है।
  • पारिस्थितिकी तंत्र: यह मुख्य रूप से शुष्क पर्णपाती वनों (Dry Deciduous Forests), कटीली झाड़ियों वाले क्षेत्रों, पहाड़ी ढलानों और प्राकृतिक पथरीले हरित आवासों में निवास करना पसंद करता है। 
  • व्यवहार: यह एक ‘आर्बोरियल’ (Arboreal) यानी पेड़ों पर रहने वाला जीव है, जो अपना अधिकांश समय झाड़ियों पर बिताता है।
    • यह ‘दिवाचर’ (Diurnal) प्रजाति है, जो दिन के उजाले में भोजन की तलाश में सबसे अधिक सक्रिय रहती है।
  • आहार चक्र: इसके प्राथमिक भोजन में पेड़-पौधों पर पाई जाने वाली छिपकलियां, गेको, छोटे मेंढक, कीड़े-मकोड़े और छोटे पक्षियों के अंडे शामिल हैं।
  • विष की प्रकृति: यह एक हल्का विषैला (Mildly Venomous) तथा ‘रियर-फैंग्ड’ (Rear-fanged) सांप है, जिसके विषदंत मुंह के पिछले हिस्से में स्थित होते हैं।
    • इसका विष केवल छोटे शिकार को वश में करने के लिए प्रभावी होता है और सामान्य परिस्थितियों में यह मनुष्यों के लिए खतरनाक या जानलेवा नहीं माना जाता। 

FAQs:

Q1. लौडांकिया वाइन स्नेक क्या है?

Ans: यह कोलब्रिडे परिवार का पेड़ों पर रहने वाला भारत का स्थानिक दुर्लभ सांप है।

Q2. यह सांप कहां देखा गया?

Ans: यह सांप राजस्थान के उदयपुर जिले के समृद्ध उबेश्वर वन्यजीव क्षेत्र में देखा गया है। 

Q3. यह प्रजाति क्यों दुर्लभ मानी जाती है?

Ans: इसके राजस्थान में अत्यंत सीमित प्रशासनिक रिकॉर्ड होने के कारण यह दुर्लभ मानी जाती है। 

Q4. क्या यह सांप विषैला होता है?

Ans: हाँ, यह पीछे के विषदंत वाला हल्का विषैला सांप है, जो मनुष्यों के लिए सुरक्षित है। 

Q5. इस खोज का वैज्ञानिक महत्व क्या है?

Ans: यह अरावली पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती और सरीसृप जैव विविधता के दस्तावेजीकरण को समृद्ध करती है।

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