छह दशक बाद भारतीय ग्रे हॉर्नबिल दिखा गुजरात के गिर जंगलों में
संदर्भ:
हाल ही में छह दशकों (लगभग 60 वर्ष) से अधिक समय तक स्थानीय रूप से विलुप्त रहने के बाद भारतीय ग्रे हॉर्नबिल (स्थानीय नाम: चिलोत्रो) ने गुजरात के गिर जंगलों में सफलतापूर्वक वापसी की।
- गुजरात वन विभाग (Forest Department) और उसके संरक्षण भागीदारों द्वारा संचालित एक विशेष ‘प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम’ (Species Recovery Programme) के तहत इस पक्षी को गिर पारिस्थितिकी तंत्र में फिर से लाया गया है।
भारतीय ग्रे हॉर्नबिल (Indian Grey Hornbill) के बारे में:
- वैज्ञानिक नाम व परिवार: यह पक्षी ‘बुसेरोटिडी’ (Bucerotidae) परिवार का सदस्य है, जिसका वैज्ञानिक नाम Ocyceros birostris है।
- शारीरिक संरचना: इसकी सबसे प्रमुख पहचान इसकी लंबी, नीचे की ओर मुड़ी हुई धूसर (ग्रे) चोंच है, जिसके ऊपर एक विशिष्ट कठोर उभार या मुकुट जैसी संरचना होती है, जिसे ‘कैस्क’ (Casque) कहा जाता है।
- वन क्षेत्र: गिर में किए गए उपग्रह ट्रैकिंग (Satellite Tracking) डेटा से पता चला है कि इन पक्षियों ने गिर के परिपक्व शुष्क मिश्रित पर्णपाती और सागौन के जंगलों (Dry Mixed Deciduous and Teak Forests) को अपने आवास के रूप में चुना है।
- घोंसले के लिए वृक्ष: ये पक्षी मुख्य रूप से बड़े और पुराने पेड़ों के खोखले तनों (Tree Cavities) में घोंसला बनाते हैं।
- गिर के जंगलों [Gir Forest] में इन्होंने मुख्य रूप से ‘कड़ायो’ (Sterculia urens) और ‘बहेड़ा’ (Terminalia bellirica) के पेड़ों को प्राथमिकता दी है।
- प्रजनन व्यवहार: हॉर्नबिल अपनी विशिष्ट और सुरक्षित घोंसला बनाने की तकनीक के लिए जाने जाते हैं। प्रजनन काल के दौरान, मादा पक्षी पेड़ के खोखले कोष्ठ के भीतर खुद को बंद कर लेती है।
- वह मिट्टी, विष्ठा और छाल का उपयोग करके घोंसले के प्रवेश द्वार को पूरी तरह सील कर देती है।
- एक संकीर्ण दरार के माध्यम से नर हॉर्नबिल पूरी प्रजनन अवधि के दौरान मादा और चूजों को भोजन पहुँचाता है।
- भोजन: भारतीय ग्रे हॉर्नबिल [Indian Grey Hornbill] को वन पारिस्थितिकी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक (Key Component) माना जाता है।
- वे मुख्य रूप से जंगली फलदार पेड़ों जैसे बरगद, पीपल, करमदा और धरामन के फल खाते हैं।
- ये पक्षी फलों को निगलने के बाद उनके बीजों को बहुत दूर-दूर के क्षेत्रों में फैलाते हैं (Seed Dispersal), जिससे वनों का प्राकृतिक रूप से पुनर्जनन (Natural Forest Regeneration) सुचारू रूप से चलता रहता है।
- गिर में पुनर्स्थापन परियोजना: वर्ष 2021 से 2023 के बीच गुजरात वन विभाग द्वारा दो चरणों में कुल 40 हॉर्नबिल पक्षियों को अरावली के जंगलों से लाकर गिर राष्ट्रीय उद्यान [Gir National Park] में मुक्त किया गया था।
- सैटेलाइट टेलीमेट्री (Satellite Telemetry): पक्षियों के व्यवहार और गतिविधियों की वैज्ञानिक निगरानी के लिए 11 नर हॉर्नबिलों में विशेष सैटेलाइट ट्रांसमीटर लगाए गए थे।
- अनुकूलन पैटर्न: डेटा से पता चला कि शुरुआती खोजपूर्ण चरण में इन पक्षियों का घरेलू दायरा (Home Range) लगभग 61 वर्ग किमी था, जो स्थायी रूप से बसने के बाद सिमटकर केवल 5.7 वर्ग किमी रह गया, जो गिर के अनुकूल वातावरण (Biodiversity) में उनके सफल जुड़ाव को दर्शाता है।
- IUCN रेड लिस्ट: इसे ‘कम चिंताजनक’ (Least Concern) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: यह भारत में कानूनी रूप से संरक्षित है। ऐतिहासिक रूप से, 1950 और 1960 के दशक में अत्यधिक शिकार (Hunting) के कारण यह गिर क्षेत्र से स्थानीय रूप से विलुप्त हो गया था।
FAQs:
Q1. भारतीय ग्रे हॉर्नबिल क्या है?
Ans: यह विशिष्ट कैस्क चोंच वाला एक स्वदेशी फलभक्षी पक्षी है, जो बीज फैलाता है।
Q2. गिर जंगल में यह पक्षी क्यों महत्वपूर्ण है?
Ans: यह फलदार बीजों का प्रसार कर गिर के वनों का प्राकृतिक पुनर्जनन बढ़ाता है।
Q3. छह दशक बाद यह पक्षी क्यों दिखाई दिया?
Ans: गुजरात वन विभाग के वैज्ञानिक प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम और पुनर्स्थापन प्रयासों से यह संभव हुआ।
Q4. ग्रे हॉर्नबिल का प्राकृतिक आवास क्या है?
Ans: यह मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप के शुष्क मिश्रित पर्णपाती वनों में पाया जाता है।
Q5. इसके संरक्षण के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
Ans: इसके संरक्षण हेतु अरावली से स्थानांतरण, घोंसला सुरक्षा और सैटेलाइट ट्रैकिंग जैसे वैज्ञानिक प्रयास जारी हैं। गया।
