Southern Indian Ocean Fisheries Agreement (SIOFA), भारत बना SIOFA का पूर्ण सदस्य
संदर्भ:
हाल ही में केंद्र सरकार ने दक्षिणी हिंद महासागर मत्स्य पालन समझौते (Southern Indian Ocean Fisheries Agreement – SIOFA) में भारत के परिग्रहण (Accession) को मंजूरी दी।
- इस फैसले से भारत को SIOFA की पूर्ण सदस्यता (SIOFA Full Membership India) प्राप्त हो गई है, जिससे भारत अब इस क्षेत्र में नियम बनाने वाला पूर्ण सदस्य बन गया।
SIOFA क्या हैं?
- परिचय: SIOFA Agreement 2026 एक कानूनी रूप से बाध्यकारी बहुपक्षीय क्षेत्रीय संधि है। यह खुले समुद्र (High Seas) के क्षेत्रों में विशिष्ट समुद्री संसाधनों के दीर्घकालिक संरक्षण और सतत प्रबंधन के लिए काम करने वाला एक क्षेत्रीय मत्स्य प्रबंधन संगठन (Regional Fisheries Management Organization – RFMO) है।
- स्थापना: इस समझौते पर 7 जुलाई 2006 को रोम में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के तत्वावधान में हस्ताक्षर किए गए थे और यह जून 2012 में लागू हुआ था।
- मुख्यालय: इसका स्थायी सचिवालय सेंट-डेनिस, रियूनियन द्वीप (फ्रांस) में स्थित है।
- क्षेत्राधिकार: यह संगठन दक्षिणी हिंद महासागर मत्स्य पालन (Southern Indian Ocean Fisheries) के अंतर्गत आने वाले अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्रों (High Seas) को नियंत्रित करता है। इसका विशिष्ट विधिक वर्गीकरण इस प्रकार है:
- शामिल संसाधन: यह मुख्य रूप से गैर-अत्यधिक प्रवासी मछली प्रजातियों (Non-highly migratory species) जैसे स्क्विड (Squid), टूथफिश (Toothfish), अल्फोंसिनो (Alfonsino), मोलस्क और क्रस्टेशियंस का प्रबंधन करता है।
- अपवर्जन (Exclusions): यह ट्यूना (Tuna) जैसी अत्यधिक प्रवासी प्रजातियों को कवर नहीं करता है। ट्यूना मछलियों का नियमन हिंद महासागर ट्यूना आयोग (IOTC) द्वारा किया जाता है, जिसका भारत 1996 से ही पूर्ण सदस्य है। इसके साथ ही, यह तटीय देशों के संप्रभु समुद्री अधिकार क्षेत्र (EEZ) के अंतर्गत आने वाली प्रजातियों पर भी लागू नहीं होता।
- भारत: भारत वर्ष 2022 से SIOFA में एक ‘सहयोगी गैर-अनुबंधकारी पक्ष’ (Cooperating Non-Contracting Party – CNCP) के रूप में शामिल था।
- 14 अक्टूबर 2026 को मिली कैबिनेट मंजूरी के बाद भारत अब एक पूर्ण अनुबंधकारी पक्ष (Full Contracting Party) बन गया।
- भारत में इस प्रक्रिया का संचालन केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय (Ministry of Fisheries India) द्वारा किया जा रहा है।
- भारत सरकार द्वारा दिसंबर 2025 में जारी ‘हाई सीज फिशरीज के लिए दिशानिर्देश’ (Guidelines for High Sea Fisheries, 2025) के उद्देश्यों को पूरा करने में यह सदस्यता एक वैधानिक ढांचा प्रदान करेगी।
भारत के लिए इसका महत्व:
- वैश्विक मत्स्य शासन में हिस्सेदारी: खुले समुद्र (High Seas) के लगभग 65% हिस्से पर वर्तमान में चीन (21%), ताइवान (13%), जापान (11%), दक्षिण कोरिया (11%) और स्पेन (8%) का दबदबा है।
- पूर्ण सदस्यता मिलने से भारत अब इन वैश्विक शक्तियों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में नियमों और कैच लिमिट (Catch Limits) के निर्धारण में मतदान और नीति-निर्माण कर सकेगा।
- आर्थिक विस्तार और गहरे समुद्र में मत्स्य पालन (Deep Sea Fisheries India): वर्तमान में भारतीय मछली पकड़ने वाले जहाज मुख्य रूप से भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर 60-80 समुद्री मील (NM) तक ही सीमित हैं।
- SIOFA की अनुमति से भारतीय ध्वज वाले जहाज (Indian-flagged vessels) गहरे समुद्र में जाकर स्क्विड और टूथफिश जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों का सतत दोहन कर सकेंगे, जिससे निर्यात आय बढ़ेगी।
- समुद्री सुरक्षा और निगरानी क्षमता: भारत इसके तहत लागू होने वाली ‘हाई सीज बोर्डिंग एंड इंस्पेक्शन’ (High Seas Boarding and Inspection – HSBI) योजना में सक्रिय रूप से भाग ले सकेगा।
- इससे भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल को अंतरराष्ट्रीय जल में अवैध और संदिग्ध जहाजों की निगरानी करने में मदद मिलेगी, जिससे राष्ट्रीय तटीय सुरक्षा मजबूत होगी।
- वैज्ञानिक अनुसंधान और डेटा तक पहुंच: भारत अब SIOFA की ‘वैज्ञानिक समिति’ (Scientific Committee) और ‘अनुपालनसमिति’ (Compliance Committee) का पूर्ण हिस्सा होगा।
- इससे भारतीय वैज्ञानिकों को हिंद महासागर के समुद्री संसाधनों (Indian Ocean Marine Resources) के स्टॉक मूल्यांकन, महासागरीय डेटा और अनुसंधान कार्यक्रमों तक सीधी पहुंच मिलेगी।
- अवैध मात्स्यिकी पर रोक: भारत इस मंच के माध्यम से हिंद महासागर क्षेत्र में होने वाली अवैध, असूचित और अनियंत्रित (IUU) मछली पकड़ने की गतिविधियों के खिलाफ वैश्विक सहयोग को बढ़ावा दे सकेगा, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण (India Ocean Conservation) संभव होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: SIOFA का पूरा नाम क्या है?
उत्तर: SIOFA का पूरा नाम दक्षिणी हिंद महासागर मत्स्य पालन समझौता (Southern Indian Ocean Fisheries Agreement) है। यह एक क्षेत्रीय मत्स्य प्रबंधन संगठन (RFMO) है।
प्रश्न 2: भारत SIOFA का पूर्ण सदस्य कब बना?
उत्तर: भारत सरकार के मत्स्य पालन मंत्रालय (Ministry of Fisheries India) की सिफारिश पर केंद्रीय कैबिनेट ने 14 अक्टूबर 2026 को भारत के पूर्ण परिग्रहण को मंजूरी दी।
प्रश्न 3: Southern Indian Ocean Fisheries Agreement का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य दक्षिणी हिंद महासागर के खुले समुद्र (High Seas) में गैर-ट्यूना मत्स्य संसाधनों का दीर्घकालिक संरक्षण और सतत मत्स्य प्रबंधन (Sustainable Fisheries Management) सुनिश्चित करना है।
प्रश्न 4: SIOFA की स्थापना कब हुई थी?
उत्तर: इस बहुपक्षीय समझौते पर 7 जुलाई 2006 को रोम में हस्ताक्षर किए गए थे और यह आधिकारिक तौर पर जून 2012 में लागू हुआ था।
प्रश्न 5: SIOFA के पूर्ण सदस्य बनने से भारत को क्या लाभ होगा?
उत्तर: भारत को खुले समुद्र में स्क्विड जैसी उच्च मूल्यवान मछलियों को पकड़ने के वैध अधिकार, वैज्ञानिक डेटा तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नीति-निर्माण में मतदान का अधिकार मिलेगा।
प्रश्न 6: SIOFA किन समुद्री क्षेत्रों में मत्स्य संसाधनों का प्रबंधन करता है?
उत्तर: यह विशेष रूप से तटीय देशों के संप्रभु राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र (EEZ) के बाहर स्थित दक्षिणी हिंद महासागर के अंतरराष्ट्रीय खुले समुद्र (High Seas) में मत्स्य गतिविधियों का प्रबंधन करता है।
