Sukhna Lake and Sauj Lake Ramsar Sites – सुखना झील और सौज झील रामसर स्थलों की सूची में शामिल
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने घोषणा की है कि चंडीगढ़ की सुखना झील (Sukhna Lake) और उत्तर प्रदेश की सौज झील (Sauj Lake) को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की रामसर सूची में शामिल कर लिया गया है। इस निर्णय के साथ ही भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 103 हो गई है।
नए रामसर स्थलों का विस्तृत विवरण:
1. सुखना झील आर्द्रभूमि, चंडीगढ़ (Sukhna Lake Ramsar Site)
- विशिष्ट पहचान: यह अंतरराष्ट्रीय रामसर सूची में साइट नंबर 2602 के रूप में दर्ज की गई है। यह केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ का पहला रामसर स्थल है।
- भौगोलिक स्थिति: यह शिवालिक पहाड़ियों (Outer Himalayas) की तलहटी में स्थित एक अर्ध-शहरी जलाशय (Peri-urban Reservoir) है। यह एक वर्षा आधारित मानव निर्मित झील है, जिसका निर्माण 1958 में किया गया था।
- पारिस्थितिकीय महत्व: सुखना आर्द्रभूमि (Sukhna Lake Wetland) जलग्रहण क्षेत्र से आने वाले तलछट और जल प्रवाह को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- यह ‘सेंट्रल एशियन फ्लाईवे’ (Central Asian Flyway) के माध्यम से प्रवास करने वाले हजारों विदेशी पक्षियों का प्रमुख शीतकालीन आश्रय स्थल है।
- प्रमुख जैव विविधता: यहाँ लुप्तप्राय पलास फिश ईगल (Pallas’s Fish Eagle), संकटग्रस्त कॉमन पोचार्ड (Common Pochard) और अत्यंत दुर्लभ ब्लैक पॉन्ड टर्टल (Black Pond Turtle) मुख्य रूप से पाए जाते हैं।
2. सौज झील, उत्तर प्रदेश (Sauj Lake Ramsar Site)
- विशिष्ट पहचान: इसे रामसर सूची में साइट नंबर 2603 के रूप में शामिल किया गया है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में रामसर स्थलों (Ramsar Sites in India) की कुल संख्या 14 हो गई है।
- भौगोलिक स्थिति: यह उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की किशनी तहसील में कृषि भूमि से घिरी एक उथली झील है, जो गंगा नदी के बाढ़ के मैदान (Ganga River Floodplain) का हिस्सा है।
- प्रशासनिक विशिष्टता: मैनपुरी अब उत्तर प्रदेश का ऐसा एकमात्र जिला बन गया है जिसमें दो रामसर स्थल हैं (पहला समान पक्षी विहार और दूसरा सौज झील)। इन दोनों के बीच की दूरी महज 5 किलोमीटर है।
- पारिस्थितिकीय महत्व: लगभग 40.759हेक्टेयर में फैली सौज झील आर्द्रभूमि (Sauj Lake Wetland) को पहले ही ‘इंपॉर्टेंट बर्ड एरिया’ (IBA) का दर्जा प्राप्त है।
- यह वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त सारस क्रेन (Sarus Crane) का सबसे सुरक्षित प्राकृतिक आश्रय स्थल माना जाता है, जहाँ शीतकाल में लगभग 2,899 सारस क्रेन का समूह देखा गया है। यहाँ पक्षियों की 96, मछलियों की 19 और सरीसृपों की 7 प्रजातियाँ निवास करती हैं।
रामसर कन्वेंशन (Ramsar Convention) क्या है?
- परिचय: रामसर कन्वेंशन (Ramsar Convention), आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके विवेकपूर्ण उपयोग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय अंतर-सरकारी पर्यावरण संधि है।
- इसकी शुरुआत 2 फरवरी 1971 को ईरानी शहर रामसर में हुई थी और यह 1975 में प्रभावी हुई।
- भारत की भागीदारी: भारत ने 1 फरवरी 1982 को इस संधि पर हस्ताक्षर किए। वर्तमान में 103 स्थलों (Indian Wetlands List) के साथ भारत दक्षिण एशिया में अग्रणी आर्द्रभूमि नेटवर्क का प्रतिनिधित्व करता है।
- राष्ट्रीय शासी निकाय: भारत में आर्द्रभूमि संरक्षण (Wetland Conservation India) का नोडल कार्य पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा ‘आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017’ के अंतर्गत किया जाता है।
- रामसर स्थल घोषित होने के मुख्य लाभ (Ramsar Designation Benefits):
- अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक निरीक्षण: इन स्थलों को वैश्विक संरक्षण बेंचमार्क और वैज्ञानिक सहयोग प्राप्त होता है。
- सतत जलग्रहण प्रबंधन: जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment Areas) के अतिक्रमण को रोकने और जल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कड़े विधिक नियम लागू होते हैं।
- इको-टूरिज्म और स्थानीय आजीविका: अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने से पक्षी प्रेमियों और शोधकर्ताओं का आगमन बढ़ता है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और सतत पर्यटन को नई उड़ान मिलती है।
- जैव विविधता और जलवायु सुरक्षा के लिए महत्व (Importance for Biodiversity Conservation India):
- प्राकृतिक जैविक स्पंज: आर्द्रभूमियाँ अत्यधिक वर्षा के जल को सोखकर बाढ़ प्रबंधन (Flood Regulation) करती हैं और सूखे के समय जल स्तर बनाए रखती हैं।
- अभूतपूर्व कार्बन सिंक: ये स्थल वनों की तुलना में अधिक तीव्रता से कार्बन का अवशोषण करते हैं, जो जलवायु सुरक्षा (Climate Security) और वैश्विक तापमान नियंत्रण के लिए अपरिहार्य है।
- प्रवासी पक्षियों का जीवन चक्र (Migratory Birds Wetlands): सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के पक्षियों के लिए भोजन, प्रजनन (Breeding) और शीतकालीन ठहराव प्रदान कर ये वैश्विक आनुवंशिक विविधता की रक्षा करती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: रामसर स्थल क्या होता है?
उत्तर: रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व की ऐसी आर्द्रभूमियों (Wetlands) को रामसर स्थल कहा जाता है, जिनका पारिस्थितिकीय और वैश्विक महत्व अत्यधिक उच्च होता है।
प्रश्न 2: सुखना झील और सौज झील को रामसर सूची में क्यों शामिल किया गया?
उत्तर: इन्हें सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के प्रवासी पक्षियों (जैसे पलास फिश ईगल) और संकटग्रस्त सारस क्रेन को सुरक्षित आवास व समृद्ध जैव विविधता प्रदान करने के कारण शामिल किया गया।
प्रश्न 3: Ramsar Convention की शुरुआत कब हुई थी?
उत्तर: इस अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संधि को आधिकारिक रूप से 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में अपनाया गया था।
प्रश्न 4: भारत में रामसर स्थलों का संरक्षण कौन करता है?
उत्तर: भारत में इन आर्द्रभूमियों का संरक्षण केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) तथा संबंधित राज्यों की राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरणों द्वारा किया जाता है।
प्रश्न 5: रामसर स्थल घोषित होने से झीलों को क्या लाभ मिलता है?
उत्तर: इससे झीलों को वैश्विक वैज्ञानिक निरीक्षण, कड़ा जलग्रहण क्षेत्र संरक्षण, अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण के अवसर और स्थानीय स्तर पर इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलता है।
प्रश्न 6: Wetlands जैव विविधता के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर: ये जल को शुद्ध करते हैं, बाढ़ और जलवायु सुरक्षा को नियंत्रित करते हैं, और पृथ्वी की लगभग 40% प्रजातियों को भोजन एवं प्रजनन आवास प्रदान करते हैं।
