भारतीय सेना की स्पेशल ‘बाज बटालियन’: ड्रोन युद्ध और हवाई निगरानी के लिए तैयार
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने विशेष ‘बाज बटालियन’ (Baaz Battalions) को सेना में शामिल करने की आधिकारिक घोषणा की।
‘बाज बटालियन’ (Baaz Battalions) के बारे में:
- परिचय: ‘बाज बटालियन’ (Baaz Battalions) आधुनिक तकनीकों, सेंसर, लंबी दूरी के मानवरहित विमानों और रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट (RPA – Remotely Piloted Aircraft) प्रणालियों के संचालन के लिए गठित भारतीय सेना की एक विशेष तकनीकी कमान है।
- गठन आधार: यह सेना की वर्तमान आरपीए उड़ानों (RPA Flights) को अपग्रेड करके और एक केंद्रीय ढांचे में लाकर बनाई गई है, जो थल सेना की ‘आर्मी एविएशन कोर’ (Army Aviation Corps) के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करेगी।
- सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने घोषणा के दौरान स्पष्ट किया कि पिछले दो वर्षों में भारतीय सेना के पास ड्रोनों की संख्या कुछ सौ से बढ़कर 50,000 से अधिक हो चुकी है और अगले 2-3 वर्षों में यह संख्या दोगुनी होने की संभावना है।
- इस विशाल नेटवर्क को संभालने के लिए ‘बाज बटालियन’ (Baaz Battalions) की स्थापना सबसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक सुधारों में से एक है।
- उद्देश्य: सेना के बेड़े में तेजी से बढ़ रहे विभिन्न प्रकार के ड्रोनों के संचालन, रखरखाव और डेटा प्रबंधन को मजबूत करना।
- वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) पर चौबीसों घंटे वास्तविक समय (Real-time) की खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही क्षमता को सशक्त करना।
- अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों और दुश्मन की सीधे गोलाबारी वाले इलाकों में वास्तविक सैनिकों को जोखिम में डाले बिना सैन्य अभियानों को गति देना।
प्रमुख विशेषताएं:
- स्पेशलिस्ट कैडर: इस बटालियन में सामान्य सैनिकों के बजाय अत्यधिक प्रशिक्षित ड्रोन ऑपरेटर्स, तकनीकी कर्मचारी, मिशन प्लानर्स और डेटा विश्लेषकों का एक विशेष पूल शामिल किया गया है।
- लाइफसाइकिल प्रबंधन: यह विंग ड्रोनों की तैनाती, हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर अपग्रेड, डेटा एक्सप्लॉइटेशन और जमीनी लड़ाकू इकाइयों (Ground Units) के साथ सीधे समन्वय का पूरा चक्र संभालेगी।
- स्ट्रक्चरल भिन्नता: यह इन्फैंट्री (पैदल सेना) की छोटी दूरी की ‘अश्विनी ड्रोन प्लाटूनों’ और आर्टिलरी (तोपखाने) की सुसाइड ड्रोन वाली ‘दिव्यास्त्र बैटरियों’ से अलग है। ‘बाज बटालियन’ केवल लंबी दूरी के बड़े ड्रोनों पर ध्यान केंद्रित करेगी।
- रणनीतिक सीख: इसका गठन रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन के साथ एलएसी गतिरोध और हालिया सैन्य अभियानों (जैसे ऑपरेशन सिंदूर) से मिले अनुभवों के आधार पर किया गया है।
महत्व:
- भविष्य के युद्धों के लिए तैयारी: अब युद्ध केवल राइफल, टैंक और तोपखाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डेटा, सेंसर और नेटवर्क-केंद्रित प्रणालियों पर आधारित हो चुके हैं। बाज बटालियन इस अंतर को कम करेगी।
- मारक क्षमता: आर्टिलरी कोऑर्डिनेशन और टारगेट एक्विजिशन (Target Acquisition) के जरिए यह दुश्मन के ठिकानों पर अचूक और सटीक हमलों (Precision Strikes) में मदद करेगी।
भारतीय सेना की अन्य सैन्य इकाइयाँ / बटालियन:
- भैरव बटालियन (Bhairav Battalion): हाल ही में गठित यह एक लाइट कमांडो बटालियन है, जो नियमित इन्फैंट्री और विशेष बलों (Para SF) के बीच की खाई को कम करती है।
- रुद्र ब्रिगेड (Rudra Brigades): आधुनिक युद्ध प्रणालियों और एकीकृत मारक क्षमता के लिए गठित विशेष युद्ध कमान।
- शक्तिबाण आर्टिलरी रेजिमेंट (Shaktibaan Artillery): आधुनिक मिसाइल और घातक तोपखाना प्रणालियों का संचालन करने वाली नव-गठित सैन्य विंग।
- दिव्यास्त्र यूनिट (Divyastra Units): मुख्य रूप से लोइटरिंग म्यूनिशन्स (Loitering Munitions) और वन-वे सुसाइड ड्रोनों को संचालित करने वाली आर्टिलरी विंग।
- डेजर्ट स्कॉर्पियंस (Desert Scorpions – 10 PARA SF): थार के रेगिस्तानी इलाकों में विशेष ऑपरेशन्स और काउंटर-इंसर्जेंसी के लिए प्रसिद्ध पैरा कमांडो यूनिट।
- वाइपर्स (Vipers – 11 PARA SF): घने जंगलों में छिपे दुश्मनों को बेहद छिपकर (Stealth) और तेजी से बेअसर करने में माहिर कमांडो विंग।
- वाघ नख (Waghnaks – 21 PARA SF): मराठा साम्राज्य के ऐतिहासिक हथियार ‘वाघ नख’ के नाम पर बनी यह यूनिट जंगल और पहाड़ी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जानी जाती है।
FAQs:
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बाज बटालियन क्या है?
यह लंबी दूरी के रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट (RPA) और सैन्य ड्रोनों के संचालन के लिए गठित भारतीय सेना की एक नई विशिष्ट तकनीकी बटालियन है।
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बाज बटालियन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य सीमाओं (LAC और LoC) पर चौबीसों घंटे हवाई निगरानी रखना, खुफिया जानकारी जुटाना और सटीक ड्रोन हमलों में सहायता करना है।
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यह बटालियन सेना के किस अंग के तहत काम करेगी?
यह मुख्य रूप से भारतीय थल सेना के ‘आर्मी एविएशन कोर’ (Army Aviation Corps) के प्रशासनिक ढांचे के तहत काम करेगी।
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भारतीय सेना को ऐसी बटालियन की आवश्यकता क्यों पड़ी?
आधुनिक युद्धों (जैसे रूस-यूक्रेन संघर्ष) में ड्रोनों के बढ़ते प्रभाव और सेना के पास मौजूद 50,000 से अधिक ड्रोनों के सुचारू प्रबंधन के लिए इसकी आवश्यकता थी।
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बाज बटालियन ‘अश्विनी’ और ‘दिव्यास्त्र’ यूनिटों से कैसे भिन्न है?
अश्विनी इकाइयाँ पैदल सेना के स्तर पर नजदीकी निगरानी करती हैं और दिव्यास्त्र आत्मघाती ड्रोनों को संभालती हैं, जबकि बाज बटालियन केवल लंबी दूरी के बड़े टोही ड्रोनों का संचालन करेगी
