विकसित भारत G RAM G’ योजना पूरे देश में लागू
संदर्भ:
हाल ही में 1 जुलाई 2026 से ‘विकसित भारत G RAM G’ योजना देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्ण रूप से लागू हो गई है। दो दशकों से चली आ रही ‘मनरेगा’ (MGNREGA) व्यवस्था को इसके द्वारा पूरी तरह प्रतिस्थापित कर दिया है।
विकसित भारत G RAM G’ योजना क्या हैं?
- परिचय: इसका पूरा नाम ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission – Gramin) है।
- यह ‘विकसित भारत मिशन’ (Viksit Bharat Mission) के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने वाला एक नया वैधानिक ढांचा है।
- लॉन्च (Launch): इस अधिनियम का विधेयक संसद द्वारा दिसंबर 2025 में पारित किया गया था, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 1 जुलाई 2026 को संपूर्ण देश में लागू किया गया है।
- मंत्रालय (Ministry): यह योजना केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) द्वारा राज्यों के समन्वय से संचालित की जा रही है।
- मुख्य उद्देश्य: ग्रामीण परिवारों को अधिक दिनों का निश्चित अकुशल शारीरिक श्रम देकर उनकी क्रय शक्ति को मजबूत करना।
- ग्रामीण अवसंरचना (Rural Infrastructure) विकास को रोजगार सृजन से जोड़ना ताकि गांवों का दीर्घकालिक आर्थिक विकास हो सके।
- गांवों को चरम मौसम की घटनाओं के प्रति लचीला (Resilient) और आत्मनिर्भर बनाना।
- ‘पंचायती राज’ (Panchayati Raj) व्यवस्था को सशक्त कर विकास की योजना बनाने की कमान सीधे ग्राम सभा को सौंपना।
योजना की प्रमुख विशेषताएं (Key Features of G RAM G Scheme):
- 125 दिनों के रोजगार की गारंटी: इस नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार गारंटी पात्रता को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन प्रति वित्तीय वर्ष कर दिया गया है।
- 60 दिनों की अवकाश अवधि (Agricultural Cushion): बुवाई और कटाई के चरम कृषि मौसम के दौरान कृषि श्रमिकों की कमी न हो, इसके लिए कुल 60 दिनों की ‘नो-वर्क अवधि’ निर्धारित की गई है ताकि किसान और मजदूर दोनों लाभान्वित हों।
- चार मुख्य विकास क्षेत्र (4 Priority Verticals): इसके तहत कराए जाने वाले कार्य चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित होंगे –
- जल सुरक्षा: जल संचयन और संरक्षण कार्य।
- बुनियादी ढांचा: मुख्य ग्रामीण कनेक्टिविटी और टिकाऊ सामुदायिक संपत्तियाँ।
- आजीविका अवसंरचना: पशुपालन, बागवानी और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए ढांचा।
- चरम मौसम शमन: सूखा, बाढ़ और जलवायु अनुकूलन से जुड़े विशेष कार्य।
- तकनीक आधारित शासन (DPI & Tracking): योजना के तहत निर्मित सभी संपत्तियों को ‘विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक’ के तहत जियो-टैग (Geo-tag) किया जाएगा और इसे ‘पीएम गति शक्ति’ राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ डिजिटल रूप से एकीकृत किया जाएगा।
- बजटीय प्रावधान: केंद्र सरकार ने चालू वर्ष के लिए ₹95,692.31 करोड़ का अंतरिम आवंटन किया है, जो राज्यों की भागीदारी मिलाकर कुल ₹1.51 लाख करोड़ से अधिक हो जाता है।
महत्व:
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण: यह विकास कार्यक्रम (Development Programme) ग्रामीण बाजारों में नकदी प्रवाह को बढ़ाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) को मंदी से बचाएगा।
- स्मार्ट विलेज की परिकल्पना: डिजिटल विलेज (Digital Village) और आधुनिक बुनियादी ढांचे के मेल से ग्रामीण-शहरी विभाजन (Rural-Urban Divide) कम होगा, जिससे गांवों में ‘स्मार्ट विलेज’ (Smart Villages) की अवधारणा साकार होगी।
- महिला सशक्तिकरण: स्वयं सहायता समूहों को विकास कार्यों से जोड़ने और महिलाओं को प्राथमिकता देने से गांवों में समावेशी विकास (Inclusive Development) को बढ़ावा मिलेगा।
- पारदर्शिता और सुशासन: नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड (ई-केवाईसी सत्यापित) और साप्ताहिक/पाक्षिक डिजिटल वेतन भुगतान से भ्रष्टाचार और लीकेज पर रोक लगेगी।
FAQs:
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विकसित भारत GRAM G योजना क्या है?
यह ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देने और गांवों के टिकाऊ बुनियादी ढांचे का पुनर्गठन करने वाली केंद्र की नई योजना है।
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GRAM G योजना का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को सुरक्षित करना, जल सुरक्षा सुनिश्चित करना और गांवों को विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप मजबूत बनाना है।
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इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों को क्या लाभ होगा?
इससे ग्रामीणों की आय बढ़ेगी, टिकाऊ सामुदायिक संपत्तियों का निर्माण होगा और कृषि कार्यों के लिए 60 दिनों का श्रम संतुलन उपलब्ध रहेगा।
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GRAM G योजना पूरे देश में कब लागू हुई?
यह कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे देश के सभी ग्रामीण अंचलों में मनरेगा के स्थान पर प्रभावी रूप से लागू हो गया है।
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योजना के अंतर्गत किन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा?
इसमें मुख्य रूप से जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, आजीविका अवसंरचना और जलवायु आपदा शमन जैसे चार प्राथमिक क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा।
