यूब्लिफेरिस झुमा

संदर्भ:
हाल ही में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के वैज्ञानिकों ने बिहार की कैमूर पहाड़ियों में छिपकली की एक नई प्रजाति ‘यूब्लिफेरिस झुमा’ (Eublepharis jhuma) की खोज की है, जो राज्य में पाया जाने वाला पहला तेंदुआ गेको है।
प्रमुख विवरण:
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खोज स्थल: यह प्रजाति बिहार के कैमूर वन्यजीव अभ्यारण्य के बाहरी इलाके (परारी क्षेत्र) में उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वनों और चट्टानी पहाड़ियों के बीच खोजी गई है।
- वैज्ञानिक टीम: इसमें ZSI के अलावा भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), रेवेनशॉ विश्वविद्यालय और फकीर मोहन विश्वविद्यालय के शोधकर्ता शामिल थे।
- नामकरण: इस प्रजाति का नाम ZSI की पहली महिला निदेशक डॉ. धृति बनर्जी के उपनाम ‘झुमा’ पर रखा गया है।
- विविधता रिकॉर्ड: इस खोज के बाद भारत में ‘यूब्लिफेरिस’ जीनस की मान्यता प्राप्त प्रजातियों की संख्या सात (7) हो गई है, जो विश्व में किसी भी एकल देश में इस जीनस की सर्वाधिक विविधता है।
यूब्लिफेरिस झुमा की विशेषताएं:
- आकार और रंग: इसकी शारीरिक लंबाई लगभग 14 सेंटीमीटर (123–142 mm) होती है। इसकी पीठ का रंग गहरा भूरा होता है, जिस पर दो हल्के धब्बेदार बैंड बने होते हैं।
- अद्वितीय शल्क (Scales): इसकी पीठ पर चपटे, मध्यम कीलदार और कंद जैसे बड़े शल्क होते हैं। विशेष बात यह है कि यदि इसकी पूंछ टूटकर दोबारा उगती है (Regenerated tail), तो नए शल्क गोलाकार के बजाय चपटे और आयताकार रूप में विकसित होते हैं।
- पकड़ क्षमता (Lamellae): इसके चौथे पैर की उंगली के नीचे बारीक बनावट वाली लकीरें (लैमेली) अधिक संख्या (22-25) में होती हैं, जो इसे चट्टानों पर मजबूत पकड़ बनाने में मदद करती हैं।
- क्लोएकल छिद्र: इसकी पूंछ के पास 12 से 13 प्रीक्लोएकल छिद्र (Precloacal pores) की एक विशेष कोणीय श्रृंखला होती है।
- आनुवंशिक भिन्नता: यह अपने सबसे करीबी सहयोगी प्रजाति ‘यूब्लिफेरिस सतपुराएन्सिस’ (E. satpuraensis) से 6.9% से 7.8% तक आनुवंशिक रूप से भिन्न है।
- संरक्षण स्थिति: तेंदुआ गेको वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत संरक्षित हैं।
- मुख्य चुनौतियाँ: अवैध अंतरराष्ट्रीय पालतू पशु व्यापार (Pet Trade), कृषि विस्तार और प्राकृतिक आवास का विनाश।