आरोग्य मैत्री परियोजना | Health Friendship Project

संदर्भ:
भारत सरकार ने हाल ही में जमैका में अपनी प्रमुख ‘आरोग्य मैत्री’ पोर्टेबल स्वास्थ्य देखभाल अवसंरचना तैनात की है, जो भारत-कैरिबियाई संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
- यह पहल भारत की ‘रणनीतिक परोपकार’ और दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
आरोग्य मैत्री परियोजना क्या हैं?
आरोग्य मैत्री परियोजना भारत सरकार की एक क्रांतिकारी पहल है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं या मानवीय संकटों का सामना कर रहे विकासशील देशों को तत्काल और प्रभावी चिकित्सा सहायता प्रदान करना है।
- इसकी घोषणा जनवरी 2023 में ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट’ के दौरान की गई थी। यह परियोजना भारत के स्वदेशी रक्षा और चिकित्सा अनुसंधान कौशल का एक उत्कृष्ट मेल है।
- यह परियोजना ‘प्रोजेक्ट भीष्म’ के तहत रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) के समन्वय से विकसित की गई है।
- इस परियोजना के सफल कार्यान्वयन में रेलटेल (RailTel) और HLL लाइफकेयर जैसी संस्थाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसे ‘रक्षा मंत्रालय’ की देखरेख में डिजाइन किया गया है।
- आरोग्य मैत्री का मुख्य घटक ‘BHISHM’ (Bharat Health Initiative for Sahyog, Hita and Maitri) क्यूब है। यह दुनिया का पहला और सबसे उन्नत ‘पोर्टेबल डिजास्टर अस्पताल’ है।
- यह अस्पताल 72 छोटे, हल्के और पोर्टेबल क्यूब्स से मिलकर बना है। इन क्यूब्स को विशिष्ट रूप से इस तरह डिजाइन किया गया है कि इन्हें चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में आसानी से ले जाया जा सके।
- इस पूरे सिस्टम को संकट स्थल पर तैनात करने और संचालित करने में मात्र 12 मिनट का समय लगता है, जो आपातकालीन चिकित्सा सहायता (Golden Hour) के क्षेत्र में एक वैश्विक रिकॉर्ड है।
तकनीकी विनिर्देश और क्षमताएं:
- उपचार क्षमता: एक आरोग्य मैत्री एड क्यूब यूनिट में 200 से अधिक हताहतों का इलाज करने की क्षमता है। यह 48 घंटों तक बिना बाहरी सहायता के स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकता है।
- सर्जिकल और डायग्नोस्टिक सुविधाएं: इसमें मिनी-ऑपरेशन थिएटर, वेंटिलेटर, पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, अल्ट्रासाउंड, डिजिटल ब्लड टेस्टिंग मशीन और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर शामिल हैं।
- स्मार्ट लॉजिस्टिक्स: प्रत्येक क्यूब ‘RFID’ (Radio Frequency Identification) टैग से लैस है। इसके साथ एक विशेष टैबलेट प्रदान किया जाता है जो इन्वेंट्री मैनेजमेंट और अस्पताल के संचालन के लिए एआई-आधारित (AI-enabled) निर्देश देता है। यह टैबलेट 180 से अधिक भाषाओं में अनुवाद कर सकता है।
अद्वितीय विशेषताएं और नवाचार:
- बहुमुखी परिवहन (Versatility): इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी पोर्टेबिलिटी है। इसे हाथ से, साइकिल पर, ड्रोन द्वारा या पैराशूट के जरिए गिराकर भी तैनात किया जा सकता है। हाल ही में इसका सफल परीक्षण 15,000 फीट की ऊंचाई पर भारतीय वायु सेना द्वारा किया गया है।
- स्थायित्व: क्यूब्स को इस तरह बनाया गया है कि वे पानी, धूल और ऊबड़-खाबड़ रास्तों के झटकों को सह सकें। ये एयरटाइट और वाटरप्रूफ हैं।
- ऊर्जा और भोजन: इसमें सौर ऊर्जा से चलने वाली लाइटें और बुनियादी भोजन पकाने की सुविधा भी शामिल है, ताकि चिकित्सा टीम आत्मनिर्भर रह सके।
हालिया वैश्विक तैनाती:
- जमैका तैनाती: हाल ही में भारत ने कैरिबियाई राष्ट्र जमैका को दो आरोग्य मैत्री क्यूब्स सौंपे हैं। यह इस क्षेत्र में इस प्रकार की पहली तैनाती है।
- मानवीय सहायता: भारत ने म्यांमार (चक्रवात मोचा के बाद), श्रीलंका और यूक्रेन जैसे देशों को ये क्यूब्स सहायता के रूप में प्रदान किए हैं।
- घरेलू उपयोग: अंतर्राष्ट्रीय सहायता के अलावा, जनवरी 2024 में अयोध्या के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान आपातकालीन चिकित्सा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसे तैनात किया गया था।
महत्व:
- दक्षिण-दक्षिण सहयोग: यह परियोजना ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के बीच तकनीकी और मानवीय सहयोग का बेहतरीन उदाहरण है।
- HADR क्षमता: यह भारत की ‘मानवीय सहायता और आपदा राहत’ (Humanitarian Assistance and Disaster Relief) की क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाती है।
- मेक इन इंडिया: यह पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक (Indigenous Technology) पर आधारित है, जो चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाती है।
- भीष्म क्यूब 2.0: सरकार अब इसके उन्नत संस्करण पर काम कर रही है जिसमें अधिक उन्नत ट्रॉमा सेंटर और बेहतर संचार प्रणालियाँ होंगी।