भारत में महिलाएं और पुरुष 2025 रिपोर्ट | Women and Men in India 2025 Report

संदर्भ:
हाल ही में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने ओडिशा में “डेटा फॉर डेवलपमेंट” शिखर सम्मेलन के दौरान अपनी प्रमुख रिपोर्ट ‘भारत में महिला और पुरुष 2025’ (Women and Men in India 2025) का 27वां संस्करण जारी किया है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:
- जन्म के समय लिंगानुपात (SRB): राष्ट्रीय स्तर पर इसमें महत्वपूर्ण सुधार देखा गया है। यह 2017-19 के 904 से बढ़कर 2021-23 में 917 हो गया है।
- राज्य-वार स्थिति: अरुणाचल प्रदेश में सबसे अधिक लिंगानुपात (1085) दर्ज किया गया, जबकि झारखंड (899) सबसे निचले स्थान पर रहा।
- शिशु मृत्यु दर (IMR): 2008 से 2023 के बीच लड़के और लड़कियों दोनों की शिशु मृत्यु दर में निरंतर गिरावट दर्ज की गई है।
- लैंगिक समानता: भारत ने प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर लैंगिक समानता (Gender Parity) प्राप्त कर ली है।
- उच्च शिक्षा में नामांकन (GER): 2021-22 और 2022-23 के बीच महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात 28.5 से बढ़कर 30.2 हो गया है। उल्लेखनीय है कि यह पुरुषों के अनुपात (28.9) से अधिक है।
- साक्षरता अंतराल: प्रगति के बावजूद, साक्षरता दर में अभी भी 14.4 प्रतिशत अंकों का लैंगिक अंतर बना हुआ है (पुरुष- 84.7%, महिला- 70.3%)।
- ग्रामीण कार्यबल में उछाल: 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में ग्रामीण महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) में भारी वृद्धि हुई है, जो 2022 के 37.5% से बढ़कर 2025 में 45.9% हो गई है।
- प्रबंधकीय भूमिकाएं: 2017 और 2025 के बीच प्रबंधकीय पदों पर महिलाओं की संख्या में 102.54% की वृद्धि हुई, जो पुरुषों की वृद्धि (73.80%) की तुलना में काफी अधिक है।
- श्रमिक जनसंख्या अनुपात: 2025 में यह पुरुषों के लिए 76.6% और महिलाओं के लिए 38.8% है।
- मातृ मृत्यु अनुपात (MMR): इसमें उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो 2004-06 के 254 से घटकर 2021-23 में 88 रह गया है।
- राजनीतिक भागीदारी: 2019 और 2024 के आम चुनावों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा। हालांकि, वर्तमान में संसद में महिलाओं की भागीदारी केवल 13.65% है।
चुनौतियां:
यह रिपोर्ट भारत में ‘नारी शक्ति’ के प्रति बढ़ते झुकाव को दर्शाती है। शिक्षा में बढ़ता नामांकन और नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं की दोगुनी वृद्धि सामाजिक बदलाव का संकेत है। हालांकि, निम्नलिखित चुनौतियां भी बनी हुई है:
- डिजिटल और कौशल अंतराल: इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग के उपयोग में महिलाएं अभी भी पुरुषों से पीछे हैं।
- अवैतनिक कार्य (Unpaid Care Work): महिलाएं पुरुषों की तुलना में घरेलू कार्यों में अधिक समय बिताती हैं, जो उनकी औपचारिक अर्थव्यवस्था में भागीदारी को सीमित करता है।
- क्षेत्रीय असमानता: लिंगानुपात और स्वास्थ्य संकेतकों में राज्यों के बीच बड़ा अंतर अभी भी एक चिंता का विषय है।
निष्कर्ष:
MoSPI की यह रिपोर्ट साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण (Evidence-based Policymaking) के लिए 50 प्रमुख संकेतकों का मेटाडेटा प्रदान करती है। भारत के लिए सतत विकास लक्ष्यों (SDG-5: लैंगिक समानता) को प्राप्त करने हेतु ग्रामीण स्वास्थ्य स्क्रीनिंग को मजबूत करना और साक्षरता अंतराल को पाटना अनिवार्य है।