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नौसेना एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज

नौसेना एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज | Naval Anti-Ship Missile-Short Range

Naval Anti-Ship Missile-Short Range

संदर्भ:

हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय नौसेना ने ओडिशा के तट (बंगाल की खाड़ी) के पास से एक स्वदेशी नौसेना एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज (NASM-SR) का पहला सफल “सल्वो लॉन्च” (Salvo Launch) पूरा किया।

नौसेना एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज (NASM-SR) क्या हैं?

नेवल एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज (NASM-SR) भारत की पहली स्वदेशी, हेलीकॉप्टर से दागी जाने वाली जहाज-रोधी मिसाइल प्रणाली है। 

  • यह एक अत्याधुनिक वायु-प्रक्षेपित (Air-launched) एंटी-शिप मिसाइल है, जिसे विशेष रूप से नौसैनिक हेलीकॉप्टरों से मध्यम और छोटी दूरी के समुद्री लक्ष्यों (युद्धपोतों और गश्ती नौकाओं) को सटीक रूप से नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 
  • यह ‘फायर एंड फॉरगेट’ (दागो और भूल जाओ) तकनीक पर आधारित है।

उद्देश्य:

  • प्रतिस्थापन: भारतीय नौसेना द्वारा उपयोग की जा रही पुरानी ब्रिटिश मूल की सी ईगल (Sea Eagle) मिसाइलों को आधुनिक स्वदेशी तकनीक से बदलना।
  • समुद्री श्रेष्ठता: समुद्र में दुश्मन के छोटे और मध्यम जहाजों के खिलाफ एक प्रभावी और त्वरित मारक क्षमता विकसित करना।
  • आत्मनिर्भरता: विदेशी आयात पर निर्भरता कम कर ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को रक्षा क्षेत्र में सशक्त बनाना।

निर्माणकर्ता:

  • डिजाइन और विकास: इसका मुख्य विकास हैदराबाद स्थित इमारत अनुसंधान केंद्र (RCI) द्वारा किया गया है। इसमें DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं जैसे DRDL, HEMRL, TBRL और ITR का भी महत्वपूर्ण सहयोग है।
  • उत्पादन: मिसाइल का उत्पादन भारतीय उद्योगों और विशेष रूप से अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस द्वारा विकास सह उत्पादन भागीदार (DCPP) कार्यक्रम के तहत किया जा रहा है।

तकनीकी विशेषताएँ:

  • वजन और पेलोड: इसका कुल वजन लगभग 380 किलोग्राम है और यह 100 किलोग्राम का उच्च-विस्फोटक (High-Explosive) वारहेड ले जा सकती है।
  • रेंज और गति: इसकी मारक क्षमता लगभग 55 किलोमीटर है। यह सबसोनिक (0.8 मैक) गति से उड़ान भरती है।
  • सी-स्किमिंग (Sea-Skimming): यह समुद्र की सतह के अत्यंत करीब (लगभग 5 मीटर) उड़ती है, जिससे दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाते।
  • गाइडेंस सिस्टम: इसमें स्वदेशी इमेजिंग इंफ्रा-रेड (IIR) सीकर है जो टर्मिनल चरण में सटीक लक्ष्यीकरण सुनिश्चित करता है।
  • मैन-इन-द-लूप (Man-in-the-Loop): इसमें हाई-बैंडविड्थ टू-वे डेटा लिंक है, जो पायलट को उड़ान के दौरान रीयल-टाइम इमेज भेजता है और लक्ष्य बदलने (In-flight retargeting) की अनुमति देता है।
  • प्रणोदन (Propulsion): इसमें सॉलिड प्रोपल्शन बूस्टर (लॉन्च के लिए) और लॉन्ग-बर्न सस्टेनर (उड़ान के लिए) का उपयोग किया गया है। 

सामरिक महत्व:

  • साल्वो क्षमता: एक ही हेलीकॉप्टर से त्वरित अंतराल में कई मिसाइलें दागने की क्षमता दुश्मन के एयर डिफेंस को भ्रमित और ध्वस्त कर देती है।
  • प्लेटफॉर्म एकीकरण: इसे वर्तमान में सी किंग (Sea King) हेलीकॉप्टर से टेस्ट किया गया है, लेकिन भविष्य में इसे MH-60R ‘रोमियो’ और स्वदेशी ALH ध्रुव हेलीकॉप्टरों पर भी तैनात किया जाएगा।
  • वॉटरलाइन हिट: यह मिसाइल जहाज के ‘वॉटरलाइन’ (पानी की सतह के पास का हिस्सा) पर प्रहार करने में सक्षम है, जिससे जहाज में पानी भरने और उसके डूबने की संभावना बढ़ जाती है।
  • रणनीतिक सुरक्षा: हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारतीय नौसेना की निगरानी और आक्रमण क्षमता को यह मिसाइल एक नया आयाम प्रदान करती है।

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