IIED Food Security Index 2026
संदर्भ:
हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण और विकास संस्थान (International Institute for Environment and Development – IIED) द्वारा नवीनतम ‘खाद्य सुरक्षा सूचकांक’ (Food Security Index) जारी किया गया है।
- जिसमें जलवायु परिवर्तन के विभिन्न परिदृश्यों (1.5°C, 2°C और 4°C ग्लोबल वार्मिंग) के तहत वैश्विक खाद्य प्रणालियों की भेद्यता (vulnerability) का आकलन किया गया है।
IIED फूड सिक्योरिटी इंडेक्स 2026 के मुख्य बिंदु:
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सूचकांक के मुख्य स्तंभ: IIED सूचकांक खाद्य सुरक्षा को चार प्रमुख आयामों के आधार पर मापता है:
- उपलब्धता (Availability): भोजन का पर्याप्त उत्पादन और आपूर्ति सुनिश्चित करना।
- पहुँच (Accessibility): भोजन तक आर्थिक और भौतिक पहुँच (सामर्थ्य)।
- उपयोग (Utilisation): पोषक तत्वों के अवशोषण की क्षमता और आहार की गुणवत्ता।
- स्थिरता/लचीलापन (Sustainability/Resilience): झटकों और जलवायु आपदाओं को सहन करने की खाद्य प्रणाली की क्षमता।
वैश्विक परिदृश्य:
- ग्लोबल स्कोर: 162 देशों के इस आकलन में वैश्विक औसत स्कोर 6.74/10 रहा है।
- शीर्ष प्रदर्शनकर्ता: आइसलैंड (9.26) प्रथम स्थान पर है, उसके बाद डेनमार (9.17), ऑस्ट्रिया (9.15), आयरलैंड (9.13) और बेल्जियम (9.07) का स्थान है।
- सबसे निम्न प्रदर्शनकर्ता: सोमालिया (1.29) सबसे नीचे है। अन्य निम्न स्कोर वाले देशों में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (2.51), हैती (2.57), मेडागास्कर (3.15) और अफगानिस्तान (3.31) शामिल हैं।
- जलवायु अन्याय (Climate Injustice): रिपोर्ट के अनुसार जिन देशों का वैश्विक उत्सर्जन में योगदान सबसे कम (लगभग 1%) है, वे जलवायु परिवर्तन के कारण खाद्य सुरक्षा में सबसे अधिक गिरावट (लगभग 22%) का सामना करेंगे।
इंडेक्स में भारत की स्थिति:
- बेसलाइन स्कोर: भारत का वर्तमान स्कोर 5.31 है, जो वैश्विक औसत (6.74) से काफी कम है।
- रैंकिंग तुलना: भारत अपने समकक्षों जैसे ब्राजील (6.72), मैक्सिको (6.36) और इंडोनेशिया (5.87) से पीछे है।
- भविष्य के अनुमान (Warming Scenarios):
- 1.5°C वार्मिंग: भारत का स्कोर घटकर 4.96 होने का अनुमान है।
- 2°C वार्मिंग: स्कोर और गिरकर 4.52 तक पहुँच सकता है।
- मुख्य चुनौतियां: भारत में मानसून पर अत्यधिक निर्भरता, खंडित कृषि (छोटे और सीमांत किसान), आय असमानता और पोषण सुरक्षा में भारी कमी इसके मुख्य कारण हैं।
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नीतिगत निहितार्थ: रिपोर्ट के अनुसार, केवल GDP बढ़ाना खाद्य सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है:
- जलवायु-अनुकूल कृषि: सूखा-प्रतिरोधी बीजों और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना आवश्यक है।
- सामाजिक सुरक्षा जाल: कमजोर आबादी की रक्षा के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और पोषण अभियानों को सुदृढ़ करना।
- बुनियादी ढांचा विकास: खाद्य हानि (Food Loss) को कम करने के लिए कोल्ड चेन और बेहतर परिवहन प्रणालियों में निवेश।
- वैश्विक सहयोग: जलवायु वित्त (Climate Finance) और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से निम्न-आय वाले देशों की मदद करना।
