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भारत की नागोया प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन पर पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट (India first national report on the implementation of the Nagoya Protocol) | Apni Pathshala

India first national report on the implementation of the Nagoya Protocol

India first national report on the implementation of the Nagoya Protocol

संदर्भ:

हाल ही में भारत ने कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी (CBD) के सचिवालय को नागोया प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन पर अपनी पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट (NR1) आधिकारिक रूप से सौंप दी। 

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:

  • सहयोग: यह रिपोर्ट पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के सहयोग से तैयार की गई है।
  • रिपोर्टिंग अवधि: यह रिपोर्ट 1 नवंबर 2017 से 31 दिसंबर 2025 तक की अवधि को कवर करती है।
  • संस्थागत ढांचा (Three-tier Structure): भारत में जैव विविधता के संरक्षण और ABS के लिए तीन-स्तरीय प्रणाली कार्य कर रही है:
    • राष्ट्रीय स्तर: राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA)।
    • राज्य स्तर: राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBBs)।
    • स्थानीय स्तर: 2.76 लाख से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियां (BMCs) गठित की गई हैं।
  • वित्तीय लाभ और समुदायों का सशक्तिकरण: रिपोर्ट के अनुसार, ‘एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग’ (ABS) ढांचे के माध्यम से ₹216.31 करोड़ (लगभग 28 मिलियन डॉलर) जुटाए गए हैं। इसमें से ₹139.69 करोड़ सीधे स्थानीय समुदायों, किसानों और पारंपरिक ज्ञान धारकों को वितरित किए गए हैं।
  • अनुपालन और पारदर्शिता: भारत ने कुल 12,830 ABS अनुमोदन जारी किए हैं। ABS क्लियरिंग-हाउस पर 3,556 IRCCs प्रकाशित किए गए हैं, जो पारदर्शिता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
  • गैर-मौद्रिक लाभ (Non-Monetary Benefits): अनुमोदन के 395 मामलों में क्षमता निर्माण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त अनुसंधान जैसे गैर-मौद्रिक लाभ भी शामिल थे।
  • क्षमता निर्माण: भारत ने 3,724 से अधिक कार्यशालाओं के माध्यम से लगभग 2.56 लाख व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया है। 
  • वैश्विक स्थिति: भारत के पास वैश्विक स्तर पर कुल ‘Internationally Recognised Certificates of Compliance’ (IRCCs) का लगभग 60% हिस्सा है।

नागोया प्रोटोकॉल (Nagoya Protocol) क्या हैं?

नागोया प्रोटोकॉल (Nagoya Protocol) जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (CBD) का एक पूरक समझौता है, जो आनुवंशिक संसाधनों तक पहुंच और उनके उपयोग से होने वाले लाभों के “उचित और न्यायसंगत बंटवारे” (Access and Benefit Sharing – ABS) से संबंधित है।

  • अपनाया गया: 29 अक्टूबर 2010 को नागोया, जापान में (COP-10 के दौरान)।
  • लागू हुआ: 12 अक्टूबर 2014 से यह प्रभावी हुआ।
  • उद्देश्य: इसका प्राथमिक लक्ष्य CBD के तीसरे उद्देश्य को लागू करना है—आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभों का निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित करना।
  • दायरा: यह प्रोटोकॉल CBD के तहत आने वाले पौधों, जानवरों और सूक्ष्मजीवों के आनुवंशिक संसाधनों तथा उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान पर लागू होता है।

संचालन के मुख्य स्तंभ:

  • पूर्व सूचित सहमति (PIC): संसाधन का उपयोग करने से पहले उस देश या स्थानीय समुदाय की अनुमति लेना अनिवार्य है।
  • पारस्परिक रूप से सहमत शर्तें (MAT): प्रदाता और उपयोगकर्ता के बीच लाभ साझा करने की शर्तों पर लिखित समझौता होना आवश्यक है।
  • अनुपालन: सदस्य देशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधिकार क्षेत्र में उपयोग किए जा रहे संसाधन कानूनी रूप से प्राप्त किए गए हैं। 
  • कानूनी ढांचा: यह शोधकर्ताओं और कंपनियों के लिए एक पारदर्शी कानूनी ढांचा प्रदान करता है ताकि वे समुदायों को लाभ पहुँचा सकें।

भारत की स्थिति:

  • भारत: भारत ने 11 मई 2011 को इस पर हस्ताक्षर किए और 12 अक्टूबर 2014 को इसकी पुष्टि (Ratification) की। 
  • कानूनी ढांचा: भारत नागोया प्रोटोकॉल को निम्नलिखित कानूनों के माध्यम से लागू करता है: 
  • जैव विविधता अधिनियम, 2002 (2023 में संशोधित)।
  • जैव विविधता नियम, 2024 और ABS विनियम, 2025

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