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India-Malaysia द्विपक्षीय सैन्य सहयोग

India-Malaysia द्विपक्षीय सैन्य सहयोग

India-Malaysia

संदर्भ:

हाल ही में नई दिल्ली में भारत और मलेशिया के बीच 12वीं सैन्य सहयोग उप-समिति (SCMC) की बैठक आयोजित की गई।

12वीं उप-समिति बैठक (SCMC) के मुख्य बिंदु: 

नई दिल्ली में आयोजित इस उच्च-स्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद और Malaysia Armed Forces के मेजर जनरल आमेर महमूद बिन अब्दुल रहमान ने की।

  • व्यापक समीक्षा: दोनों पक्षों ने Indian Armed Forces और मलेशियाई सेना के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास, स्टाफ वार्ता और क्षमता निर्माण (Capacity Building) के अनुभवों की समीक्षा की।
  • नए सुरक्षा आयाम: पारंपरिक रक्षा सहयोग से आगे बढ़ते हुए अब Cyber Security, रक्षा विनिर्माण (Defence Manufacturing) और रक्षा प्रौद्योगिकी (Defence Technology) में द्विपक्षीय साझेदारी का विस्तार करने पर सहमति बनी।
  • क्षेत्रीय सुरक्षा साझा दृष्टिकोण: दोनों देशों ने Indo Pacific Security (हिंद-प्रशांत सुरक्षा) को मजबूत करने और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के तहत मुक्त नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।
  • बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग: ADMM-Plus (आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक) ढांचे के तहत आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह (Counter-Terrorism Working Group) में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। 

भारत-मलेशिया रक्षा संबंध (India-Malaysia Defence Relations):

दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक रक्षा संबंधों की नींव वर्ष 1993 में हस्ताक्षरित रक्षा सहयोग समझौता ज्ञापन (MoU) पर टिकी है, जिसे जुलाई 2023 में आधुनिक चुनौतियों के अनुसार संशोधित किया गया था।

  • Joint Military Exercise (संयुक्त सैन्य अभ्यास): ‘हरिमऊ शक्ति’ (Harimau Shakti) दोनों सेनाओं के बीच आयोजित होने वाला एक प्रमुख वार्षिक अभ्यास है, जिसका 5वां संस्करण दिसंबर 2025 में राजस्थान में संपन्न हुआ था। यह अंतःक्रियाशीलता (Interoperability) को बढ़ावा देता है।
  • Defence Diplomacy (रक्षा कूटनीति) एवं प्रशिक्षण: दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य संस्थानों में अधिकारियों को प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए भेजते हैं। भारतीय नौसेना के जहाज नियमित रूप से मलेशियाई बंदरगाहों का दौरा करते हैं।
  • रक्षा उद्योग सहयोग: भारत ने मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) का क्षेत्रीय कार्यालय खोला है। भारत मलेशिया को अपने उन्नत रक्षा उत्पादों (जैसे तेजस लड़ाकू विमान) के निर्यात और संयुक्त विकास परियोजनाओं के अवसर तलाश रहा है।
  • HADR ऑपरेशन्स: दोनों नौसेनाएं मानवीय सहायता और आपदा राहत (Humanitarian Assistance and Disaster Relief) कार्यों में अपनी क्षमताओं के आधुनिकीकरण के लिए मिलकर काम कर रही हैं। 

भारत के लिए मलेशिया का रणनीतिक महत्व:

India-Malaysia Strategic Partnership (भारत-मलेशिया रणनीतिक साझेदारी) भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) और ‘सागर’ (SAGAR) विजन का एक अनिवार्य हिस्सा है:

  • मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) पर नियंत्रण: मलेशिया दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री चोकपॉइंट्स में से एक, मलक्का जलडमरूमध्य पर स्थित है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
  • चीन का भू-रणनीतिक प्रतिसंतुलन (Countering China): दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते सैन्य दावों और आक्रामक रुख को संतुलित करने में मलेशिया भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है।
  • आसियान (ASEAN) में केंद्रीय भूमिका: मलेशिया, आसियान गुट का एक प्रभावशाली सदस्य देश है। इसके साथ मजबूत सैन्य संबंध स्थापित करके भारत दक्षिण-पूर्वी एशिया में अपनी सुरक्षा उपस्थिति और विश्वसनीयता को मजबूत करता है। 

FAQs:

  1. भारत-मलेशिया रक्षा सहयोग क्या है?

    यह दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यासों, सैन्य संवाद और समुद्री रक्षा तकनीकों के आदान-प्रदान की एक रणनीतिक साझेदारी है।

  2. भारत और मलेशिया के बीच सैन्य सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?

     यह समुद्री सुरक्षा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने और आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  3. दोनों देशों के बीच किन क्षेत्रों में रक्षा सहयोग है?

    दोनों देशों के बीच संयुक्त अभ्यासों, सैन्य प्रशिक्षण, साइबर सुरक्षा, आपदा राहत (HADR) और रक्षा विनिर्माण उद्योगों में गहरा सहयोग है।

  4. भारत-मलेशिया संयुक्त सैन्य अभ्यास का उद्देश्य क्या है?

     ‘हरिमऊ शक्ति’ जैसे अभ्यासों का मुख्य उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच अंतःक्रियाशीलता बढ़ाना और आतंकवाद विरोधी अभियानों में अनुभव साझा करना है।

  5. भारत-मलेशिया रणनीतिक साझेदारी से क्या लाभ होंगे?

    इससे दोनों देशों को समुद्री व्यापारिक मार्गों (जैसे मलक्का जलडमरूमध्य) की सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए स्थिर हिंद-प्रशांत क्षेत्र प्राप्त होगा।

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