India Tribal Festival 2026

संदर्भ:
नई दिल्ली के सुंदर नर्सरी में 18 से 30 मार्च 2026 तक भारत जनजाति महोत्सव 2026 (Bharat Tribes Fest 2026) का भव्य आयोजन किया जा रहा है। जिसमें भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत, कला, संस्कृति और उद्यमशीलता का प्रदर्शन किया जा रहा है।
भारत जनजाति महोत्सव 2026 के मुख्य विवरण:
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- दिनांक: 18 से 30 मार्च 2026
- स्थान: सुंदर नर्सरी, नई दिल्ली।
- उद्घाटन: केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम द्वारा किया गया।
- उद्देश्य: महोत्सव का मुख्य उद्देश्य जनजातीय कारीगरों को आत्मनिर्भर भारत और ‘वोकल फॉर लोकल’ के तहत राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जोड़ना है।
मुख्य आकर्षण:
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- RISA) पहल: इस पहल के तहत अंजू मोदी और मनीष त्रिपाठी जैसे प्रसिद्ध डिजाइनरों ने जनजातीय कारीगरों के साथ मिलकर एरी सिल्क (Eri Silk), कोटपाड़ कॉटन और डोंगरिया कढ़ाई जैसे स्वदेशी वस्त्रों को वैश्विक फैशन से जोड़ा है।
- वन से थाली तक (Forest-to-Plate): इस आंदोलन के माध्यम से आगंतुक 120 जनजातीय व्यंजनों का अनुभव कर सकते हैं, जो जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्यप्रद और प्राकृतिक भोजन प्रणालियों को प्रदर्शित करते हैं।
- वन धन विकास केंद्र (VDVK): महोत्सव में देश भर के 78 VDVK और 310 से अधिक मास्टर कारीगरों के 200 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं।
- सांस्कृतिक प्रदर्शन: महोत्सव में 400 से अधिक कलाकार पारंपरिक नृत्य और संगीत (जैसे मुंडारी और थारू नृत्य) प्रस्तुत करेंगे।
- भारत ट्राइब्स बिजनेस कॉन्क्लेव (19-27 मार्च): यह कॉन्क्लेव नीति निर्माताओं और उद्यमियों के लिए टिकाऊ वस्त्र और जनजातीय खाद्य प्रणालियों पर चर्चा करने का मंच है।
- CSR कॉन्क्लेव (24 मार्च): इसका उद्देश्य कॉर्पोरेट संस्थानों और जनजातीय उद्यमियों के बीच की दूरी को पाटना है ताकि स्थायी आजीविका के अवसर पैदा किए जा सकें।
भारत में जनजातीय समुदायों (Scheduled Tribes – STs) की स्थिति:
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- जनसंख्या: 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में जनजातीय जनसंख्या लगभग 10.45 करोड़ है, जो कुल जनसंख्या का 8.6% है।
- सर्वाधिक जनसंख्या: मध्य प्रदेश में जनजातीय आबादी सबसे अधिक है, जबकि प्रतिशत के मामले में लक्षद्वीप (94.8%) और मिजोरम (94.4%) शीर्ष पर हैं।
- PVTGs: भारत में 75 समूहों को ‘विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह’ (Particularly Vulnerable Tribal Groups) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो अत्यधिक पिछड़ेपन का सामना कर रहे हैं।
संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा:
- अनुच्छेद 342: राष्ट्रपति द्वारा जनजातियों को ‘अनुसूचित जनजाति’ के रूप में अधिसूचित करने का प्रावधान।
- 5वीं और 6वीं अनुसूची: जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन और स्वायत्तता के लिए विशेष प्रावधान (जैसे असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम में स्वायत्त जिला परिषदें)।
- पेसा अधिनियम (PESA), 1996: ग्राम सभाओं को प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय स्वशासन पर अधिकार प्रदान करता है।
- वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006: जनजातियों को उनके पारंपरिक वन क्षेत्रों पर कानूनी अधिकार सुनिश्चित करता है।
सामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ:
- साक्षरता: जनजातीय साक्षरता दर (लगभग 59%) राष्ट्रीय औसत (73%) से काफी कम है। विशेष रूप से जनजातीय महिलाओं में शिक्षा का अभाव एक बड़ी चुनौती है।
- स्वास्थ्य: सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anemia) और कुपोषण इन समुदायों में प्रमुख स्वास्थ्य समस्याएं हैं। सरकार ने 2047 तक सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन शुरू किया है।
- गरीबी और विस्थापन: विकास परियोजनाओं (बांध, खनन) के कारण जनजातीय समुदायों का बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ है, जिससे उनकी आजीविका और संस्कृति प्रभावित हुई है।
सरकार की प्रमुख पहल:
- PM-JANMAN: विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के समग्र विकास के लिए ₹24,000 करोड़ का मिशन।
- एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS): गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए देशभर में इनका नेटवर्क विस्तारित किया जा रहा है।
- वन धन विकास केंद्र (VDVK): जनजातीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन और विपणन (TRIFED के माध्यम से) के लिए।
- जनजातीय गौरव दिवस: भगवान बिरसा मुंडा की जयंती (15 नवंबर) को जनजातीय योगदान के सम्मान में मनाया जाता है।