Narcotics Control Bureau

संदर्भ:
हाल ही में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 17 मार्च 2027 को अपना 41वां स्थापना दिवस मनाया। वर्ष 1986 में अपनी स्थापना के बाद से यह ब्यूरो भारत में मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध एक सशक्त प्रहरी की भूमिका निभा रहा है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के बारे मे:
- गठन: एनसीबी की स्थापना 17 मार्च 1986 को की गई थी।
- वैधानिक आधार: इसका गठन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 की धारा 4(3) के प्रावधानों के अंतर्गत किया गया है।
- मंत्रालय: यह केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
- उद्देश्य: अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों (जैसे 1961, 1971 और 1988 के UN कन्वेंशन) के तहत भारत के संधि दायित्वों को पूरा करना और ड्रग तस्करी को नियंत्रित करना।
- मुख्यालय: नई दिल्ली।
- नेतृत्व: इसका नेतृत्व महानिदेशक (DG) द्वारा किया जाता है, जो सामान्यतः एक वरिष्ठ IPS या IRS अधिकारी होते हैं। वर्तमान महानिदेशक श्री अनुराग गर्ग (IPS) हैं।
- क्षेत्रीय उपस्थिति: देश भर में इसके विभिन्न ज़ोनल (जैसे मुंबई, इंदौर, कोलकाता आदि) और सब-ज़ोनल कार्यालय हैं, जिनका हाल ही में सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे श्रीनगर, अगरतला और ईटानगर में विस्तार किया गया है।
मुख्य कार्य एवं उत्तरदायित्व:
- समन्वय (Coordination): विभिन्न राज्य पुलिस विभागों, सीमा शुल्क (Customs), केंद्रीय आर्थिक खुफिया ब्यूरो (CEIB) और अन्य एजेंसियों के बीच सेतु के रूप में कार्य करना।
- प्रवर्तन (Enforcement): नशीली दवाओं की बड़ी खेपों को ज़ब्त करना और अंतरराष्ट्रीय संगठित ड्रग सिंडिकेट्स का भंडाफोड़ करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: इंटरपोल और UNODC जैसी वैश्विक संस्थाओं के साथ खुफिया जानकारी साझा करना।
- डेटा प्रबंधन: गिरफ्तार नारको-अपराधियों पर राष्ट्रीय एकीकृत डेटाबेस (NIDAAN) का संचालन करना।
- युवा आउटरीच कार्यक्रम: दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री वेंकटेश्वर कॉलेज सहित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाए गए।
- मिशन स्पंदन (Mission SPANDAN): आध्यात्मिक संगठनों (जैसे ISKCON, Art of Living आदि) के साथ मिलकर नशा मुक्ति के लिए सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया।
वर्तमान चुनौतियां:
- डार्कनेट और क्रिप्टो: तस्करी के नए डिजिटल माध्यमों (Darknet और Crypto-currency) से निपटना एक बड़ी तकनीकी चुनौती है।
- सिंथेटिक ड्रग्स: पारंपरिक नशों के स्थान पर मेफेड्रोन (M-cat) और MDMA जैसे सिंथेटिक ड्रग्स का बढ़ता प्रचलन।
- सीमा पार तस्करी: पड़ोसी देशों से होने वाली अवैध तस्करी और “नार्को-टेररिज्म” का मुकाबला करना।