स्वदेशी एयर कुशन वाहन

संदर्भ:
हाल ही में भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard – ICG) ने गोवा के रस्सेम यार्ड (Rassaim Yard) में चौथी, पांचवीं और छठी एयर कुशन व्हीकल (ACV) या होवरक्राफ्ट के लिए ‘गर्डर-लेइंग’ समारोह आयोजित किया।
एयर कुशन व्हीकल (ACV) के बारे में:
- परिचय: एयर कुशन व्हीकल (ACV) एक अनूठा उभयचर (Amphibious) शिल्प है जो ‘सतह प्रभाव’ (Surface Effect) के सिद्धांत पर कार्य करता है। यह वाहन सतह (पानी, जमीन, या दलदल) के ठीक ऊपर हवा के एक मोटे कुशन पर तैरता है।
- तकनीकी रूप से, इसे ‘नॉन-डिस्प्लेसमेंट’ क्राफ्ट कहा जाता है, क्योंकि यह पानी को विस्थापित करने के बजाय उसके ऊपर बना रहता है।
मुख्य उद्देश्य:
- दुर्गम क्षेत्रों तक पहुँच: उन तटीय क्षेत्रों, दलदली भूमि और उथले पानी में पहुँचना जहाँ पारंपरिक जहाज या नावें गहराई की कमी के कारण नहीं जा सकतीं।
- त्वरित प्रतिक्रिया (Rapid Response): उच्च गति की क्षमता के कारण, समुद्री संकट या अवैध घुसपैठ के समय कम समय में घटनास्थल पर पहुँचना।
- उभयचर परिचालन: बिना किसी विशेष गोदी (Dock) या बंदरगाह के, सीधे समुद्र से जमीन पर सैनिकों और रसद को उतारना।
निर्माणकर्ता:
- विश्व स्तर पर ग्रिफन होवरवर्क (UK) इस तकनीक में अग्रणी है।
- चौगुले एंड कंपनी (Chowgule & Co. Pvt. Ltd.): वर्तमान में भारत का पहला निजी शिपयार्ड है जो भारतीय तटरक्षक बल के लिए स्वदेशी रूप से 6 एयर कुशन वाहनों का निर्माण कर रहा है।
- तकनीकी सहयोग: ये वाहन यूनाइटेड किंगडम के डिजाइन सहयोग से ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत गोवा के रस्सेम यार्ड में बनाए जा रहे हैं। इसमें लगभग 50% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।
प्रमुख विशेषताएं:
- स्कर्ट सिस्टम (Skirt System): वाहन के चारों ओर लगे लचीले रबर स्कर्ट हवा को नीचे कैद रखते हैं, जिससे वाहन सतह से लगभग 1 से 2 मीटर ऊपर उठ जाता है।
- प्रोपल्शन (Propulsion): इसमें पीछे की ओर बड़े पंखे (Aerofoil Fans) लगे होते हैं जो हवा को पीछे धकेल कर आगे की गति (Thrust) प्रदान करते हैं।
- बहु-सतह क्षमता: यह पानी, कीचड़, रेत, घास और बर्फ पर समान दक्षता से चल सकता है।
- गति और पेलोड: आधुनिक ACV 45-55 समुद्री मील (Knots) की गति प्राप्त कर सकते हैं और भारी मात्रा में सैन्य उपकरण या यात्रियों को ढो सकते हैं।
- उन्नत सेंसर: ये रडार, नाइट विजन, और इंफ्रारेड (FLIR) कैमरों से लैस होते हैं, जो रात में भी गश्त करने में सक्षम बनाते हैं।
रणनीतिक महत्व:
- तटीय सुरक्षा और निगरानी: भारत की 7,517 किमी लंबी तटरेखा की सुरक्षा के लिए ACV अनिवार्य हैं। विशेष रूप से गुजरात के ‘सर क्रीक’ जैसे दलदली क्षेत्रों में, जहाँ घुसपैठ का खतरा रहता है, ये वाहन प्रभावी सुरक्षा प्रदान करते हैं।
- खोज एवं बचाव (SAR): चक्रवात या बाढ़ के दौरान, जहाँ मलबे के कारण सामान्य नावें नहीं चल सकतीं, ACV जीवन रक्षक साबित होते हैं।
- आतंकवाद और तस्करी पर लगाम: ये वाहन संदिग्ध नौकाओं का पीछा करने और उन्हें पकड़ने में पारंपरिक जहाजों से कहीं अधिक तेज और प्रभावी हैं।
- आत्मनिर्भरता (Self-Reliance): स्वदेशी निर्माण से न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होती है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में MSMEs को भी मजबूती मिलती है, जिससे भारत एक वैश्विक रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में उभरता है।