साइकी अंतरिक्ष यान

संदर्भ:
हाल ही में नासा के साइकी अंतरिक्ष यान ने मंगल ग्रह की एक अद्भुत ‘क्रेसेंट’ (अर्धचंद्राकार) छवि कैद की। यान ने मंगल ग्रह से लगभग 48 लाख किलोमीटर (30 लाख मील) की दूरी पर रहते हुए इसकी एक पतली चमकती हुई यह तस्वीर ली।
साइकी अंतरिक्ष यान के बारे में:
- परिचय: यह यान मुख्य रूप से मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित धात्विक क्षुद्रग्रह ’16 साइकी’ तक पहुँचने और उसकी गहन जाँच करने के लिए विशेष रूप से निर्मित किया गया है।
- निर्माण: साइकी अंतरिक्ष यान का मुख्य ढांचा ‘मैक्सर टेक्नोलॉजीज’ द्वारा निर्मित किया गया है, जिसे ‘सोलर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (SEP) चेसिस’ कहा जाता है।
- आकार: यान का मुख्य शरीर (Bus) लगभग एक बड़ी एसयूवी (SUV) कार के आकार का है, जिसकी लंबाई 4.9 मीटर (16 फीट) और चौड़ाई 2.4 मीटर (8 फीट) है।
- जब इसके दो विशाल सौर पैनल पूरी तरह से खुल जाते हैं, तो यान की लंबाई लगभग 24.76 मीटर (81 फीट) हो जाती है, जो एक टेनिस कोर्ट के बराबर है।
- वजन: लॉन्च के समय यान का कुल वजन लगभग 2,747 किलोग्राम था, जिसमें वैज्ञानिक उपकरण और ईंधन शामिल हैं।
- प्रणोदन प्रणाली: साइकी यान की सबसे बड़ी विशेषता इसका सोलर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (SEP) है। यह गहरे अंतरिक्ष में जाने के लिए रासायनिक ईंधन (रॉकेट इंजन) के बजाय सौर ऊर्जा और गैस का उपयोग करता है।
- जेनॉन गैस (Xenon Gas): यान अपने साथ लगभग 1,085 किलोग्राम ‘जेनॉन’ गैस ले गया है। यह गैस रासायनिक रूप से निष्क्रिय (Inert) होती है और ईंधन के रूप में उपयोग की जाती है।
- कार्यप्रणाली: सौर पैनलों से प्राप्त बिजली का उपयोग करके जेनॉन गैस के परमाणुओं को आयनित (Ionize) किया जाता है। इन आयनों को चुंबकीय क्षेत्र के माध्यम से बहुत उच्च गति से यान के पीछे से बाहर निकाला जाता है, जिससे यान को आगे बढ़ने का धक्का मिलता है।
- शक्ति स्रोत: चूंकि यान सूर्य से बहुत दूर (क्षुद्रग्रह बेल्ट में) जा रहा है, इसे बहुत बड़े सौर पैनलों की आवश्यकता होती है।
- इसमें दो ‘क्रॉस’ के आकार के सौर पैनल लगे हैं, जिनमें कुल पांच पैनल लगे हैं।
- पृथ्वी के पास ये पैनल लगभग 20 किलोवाट बिजली पैदा करते हैं, लेकिन क्षुद्रग्रह 16 साइकी तक पहुँचते-पहुँचते यह उत्पादन घटकर केवल 2.3 किलोवाट रह जाएगा।
- हाई-गेम एंटीना (HGA): इसमें 2 मीटर व्यास वाला एक शक्तिशाली एंटीना लगा है जो रेडियो तरंगों (X-band) के माध्यम से संचार करता है।
- डीप स्पेस ऑप्टिकल कम्युनिकेशन (DSOC): यह यान की सबसे क्रांतिकारी तकनीक है। यह एक लेजर-आधारित संचार उपकरण है। यह पारंपरिक रेडियो फ्रीक्वेंसी की तुलना में बहुत अधिक मात्रा में डेटा (वीडियो, उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेज) भेजने में सक्षम है।
- मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजर: इसमें दो उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले कैमरे लगे हैं जो क्षुद्रग्रह की भूवैज्ञानिक और स्थलाकृतिक जानकारी एकत्र करेंगे।
- तापीय नियंत्रण: गहरे अंतरिक्ष के अत्यधिक ठंडे वातावरण और सूर्य के निकट होने पर होने वाली गर्मी को सहने के लिए यान को विशेष ‘मल्टी-लेयर इंसुलेशन’ (MLI) कंबल से ढका गया है।
- नेविगेशन: साइकी यान में उन्नत ‘स्टार ट्रैकर्स’ और ‘इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट’ लगे हैं। चूंकि पृथ्वी से सिग्नल पहुँचने में समय लगता है, इसलिए यान को काफी हद तक स्वायत्त बनाया गया है।