INS Malvan: स्वदेशी ASW-SWC पोत आईएनएस मालवन नौसेना में होगा शामिल
संदर्भ:
भारतीय नौसेना अपनी तटीय सुरक्षा को अत्यधिक अभेद्य बनाने के लिए माहे श्रेणी के दूसरे अत्याधुनिक पनडुब्बी-रोधी युद्धक पोत आईएनएस मालवन (INS Malvan) को 22 जुलाई 2026 को अपने बेड़े में शामिल करेगी।
- इसकी अध्यक्षता वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह करेंगे। साथ ही पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सयान भी उपस्थित रहेंगे।
आईएनएस मालवन (INS Malvan) के बारे मे:
- परिचय: आईएनएस मालवन एक उथले पानी का शिल्प (Shallow Water Craft: SWC) युद्धपोत है। इसे विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने और उन्हें नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- श्रेणी: यह भारतीय नौसेना के ‘माहे श्रेणी’ (Mahe-Class) के तहत विकसित किया जा रहा दूसरा पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti Submarine Warfare) पोत है।
- इसका नाम छत्रपति शिवाजी महाराज की नौसैनिक विरासत से जुड़े ऐतिहासिक तटीय शहर ‘मालवन’ के नाम पर रखा गया है।
- निर्माणकर्ता: इस युद्धपोत का व्यापक निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख शिपबिल्डिंग कंपनी कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard Limited (CSL), कोच्चि द्वारा किया गया है।
- इसके तहत कुल 8 पोतों का निर्माण होना है।
- आईएनएस मालवन की कील (Keel) 21 फरवरी 2023 को रखी गई थी, जबकि 30 नवंबर 2023 को इसे लॉन्च किया गया था।
- नौसेना को यह 31 मार्च 2026 को आधिकारिक रूप से डिलीवर हुआ था।
- मेक इन इंडिया रक्षा (Make in India Defence): इस पोत के निर्माण में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्रियों का उपयोग किया गया है।
- इसमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) जैसी स्वदेशी रक्षा विनिर्माण कंपनियों का महत्वपूर्ण सहयोग शामिल है।
प्रमुख विशेषताएं:
- आयाम और विस्थापन: इसकी कुल लंबाई लगभग 78 मीटर, चौड़ाई 11.26 मीटर और इसका कुल विस्थापन (Displacement) लगभग 1,100 टन है।
- पंप-जेट प्रणोदन तकनीक: यह भारतीय नौसेना के उन चुनिंदा युद्धपोतों में शामिल है जो उन्नत वाटर-जेट प्रोपल्शन (Water-jet Propulsion) तकनीक द्वारा संचालित होते हैं। यह तकनीक उथले जल में पोत को तीव्र गति और उच्च गतिशीलता (Maneuverability) प्रदान करती है।
- गति और क्षमता: यह पोत अधिकतम 25 नॉट (लगभग 46 किमी/घंटा) की गति प्राप्त कर सकता है और इसकी निरंतर परिचालन क्षमता (Endurance) 14 दिनों की है।
- घातक हथियार और सेंसर: यह युद्धपोत आरबीयू-6000 पनडुब्बी-रोधी रॉकेट लॉन्चर, हल्के टॉरपीडो लॉन्चर और माइन-बिछाने वाली रेल्स से पूरी तरह लैस है। इसमें जल के भीतर की टोह लेने के लिए स्वदेशी ‘अभय सोनार’ (Abhay Sonar) प्रणाली स्थापित है।
महत्व:
- तटीय जलक्षेत्र में सुरक्षात्मक प्रभुत्व: गहरे समुद्र की तुलना में तटीय और उथले पानी में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना अत्यधिक जटिल होता है। यह ASW SWC Vessel अपनी उन्नत सोनार प्रणालियों से इस विधिक शून्यता को दूर करेगा।
- पुरानी प्रणालियों का प्रतिस्थापन: आईएनएस मालवन नौसेना के पुराने हो रहे ‘अभय श्रेणी’ (Abhay-Class) के कार्वेट जहाजों का स्थान लेगा, जिससे नौसैनिक आधुनिकीकरण (Naval Modernization) को नई गति मिलेगी।
- बहुआयामी भूमिका (LIMO Operations): पनडुब्बी शिकार के अलावा, यह पोत कम तीव्रता वाले समुद्री संचालन (LIMO), तटीय गश्त, खोज एवं बचाव (SAR) तथा समुद्री सुरक्षा अभियानों को सटीकता से अंजाम देने में सक्षम है।
- आत्मनिर्भर भारत विजन को बल: रक्षा उत्पादन Defence Production में भारी स्वदेशीकरण के कारण यह पोत विदेशी सैन्य निर्भरता को कम करता है और देश के घरेलू एमएसएमई (MSME) रक्षा इकोसिस्टम को मजबूती प्रदान करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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INS मालवन क्या है?
यह कोचीन शिपयार्ड द्वारा निर्मित माहे श्रेणी का दूसरा अत्याधुनिक और स्वदेशी एंटी-सबमरीन वारफेयर उथले पानी का युद्धपोत है।
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ASW-SWC का क्या अर्थ है?
इसका पूरा अर्थ ‘एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट’ (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft) है, जो उथले पानी में पनडुब्बी-रोधी युद्ध के लिए उपयोग होता है।
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INS मालवन की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
इसमें 80% स्वदेशी सामग्री, वाटर-जेट प्रणोदन, 25 नॉट की गति, अभय सोनार (Sonar) और पनडुब्बी-रोधी रॉकेट व टॉरपीडो प्रणालियां शामिल हैं।
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भारतीय नौसेना के लिए यह पोत क्यों महत्वपूर्ण है?
यह भारतीय रक्षा समाचार (Indian Defence News) के अनुसार तटीय जल में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों को नष्ट कर भारत की समुद्री सुरक्षा को अभेद्य बनाएगा।
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INS मालवन का निर्माण किसने किया है?
इस लड़ाकू युद्धपोत का पूरी तरह से डिजाइन और निर्माण भारत के अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्ड, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा किया गया है।
