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यूके में छोटे बच्चों के स्क्रीन टाइम संबंधी नए नियम जारी (New rules on screen time for young children issued in UK) | UPSC

New rules on screen time for young children issued in UK

New rules on screen time for young children issued in UK

संदर्भ:

हाल ही में यूके सरकार ने 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए अपनी पहली साक्ष्य-आधारित स्क्रीन टाइम गाइडलाइन्स जारी की हैं। यह निर्देश बच्चों के शारीरिक विकास, नींद और मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जारी किए गए हैं। 

यूके की नई स्क्रीन टाइम गाइडलाइन्स:

    • 0 से 2 वर्ष के बच्चे: इस आयु वर्ग के बच्चों के लिए स्क्रीन का उपयोग पूरी तरह से वर्जित (Avoid) किया जाना चाहिए। केवल वीडियो कॉलिंग जैसे कार्यों की अनुमति है जो सामाजिक मेलजोल और बॉन्डिंग को बढ़ावा देते हैं।
    • 2 से 5 वर्ष के बच्चे: इनके लिए स्क्रीन समय प्रतिदिन अधिकतम 1 घंटे तक सीमित करने की सलाह दी गई है।
    • प्रतिबंधित समय: भोजन के दौरान और सोने से कम से कम 1 घंटे पहले स्क्रीन का उपयोग बिल्कुल नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह नींद के पैटर्न को प्रभावित करता है।
    • कंटेंट पर नियम: माता-पिता को ‘फास्ट-पेस्ड’ (तेज गति वाले) और सोशल मीडिया स्टाइल वीडियो के बजाय धीमी गति वाले, उम्र के अनुकूल शैक्षिक कंटेंट चुनने का सुझाव दिया गया है।  
  • स्क्रीन स्वैप: गाइडलाइन्स में माता-पिता को डिजिटल उपकरणों के स्थान पर पारंपरिक गतिविधियों को अपनाने के लिए “स्क्रीन स्वैप” का सुझाव दिया गया है:

  • भोजन के समय फोन के बजाय टेबल गेम्स या बातचीत करना।
  • सोने से पहले वीडियो के बजाय कहानियां पढ़ना।
  • बच्चों को अकेले स्क्रीन देने के बजाय ‘को-व्यूइंग’ (Co-viewing) करना, यानी साथ बैठकर चर्चा करना, जिससे उनके संज्ञानात्मक विकास में मदद मिलती है।

महत्व:

  • डिजिटल स्वास्थ्य: यह नीति विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुरूप है, जो 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए शून्य स्क्रीन समय की वकालत करता है।
  • मानव संसाधन की गुणवत्ता: बचपन में स्क्रीन सीमित करने से आने वाली पीढ़ी की एकाग्रता (Attention Span) और सीखने की क्षमता बेहतर होगी, जो भविष्य के जटिल कार्यबल (Workforce) के लिए अनिवार्य है।
  • डिजिटल विनियमन: यह दिशा-निर्देश भविष्य में टेक कंपनियों के ‘व्यसनकारी एल्गोरिदम’ को नियंत्रित करने और बच्चों के लिए ‘सुरक्षित डिजिटल स्पेस’ बनाने का कानूनी आधार बनेंगे।
  • मानसिक स्वास्थ्य संकट का समाधान: भविष्य में किशोरों में बढ़ते अवसाद और एंग्जायटी को रोकने के लिए यह ‘निवारक स्वास्थ्य सेवा’ के रूप में कार्य करेगा।

भारत में बच्चों के स्क्रीन टाइम संबंधी दिशा निर्देश:

  • PRAGYATA गाइडलाइन्स (शिक्षा मंत्रालय): ऑनलाइन शिक्षा के लिए जारी इन नियमों के अनुसार, प्री-प्राइमरी छात्रों के लिए स्क्रीन टाइम प्रतिदिन 30 मिनट से अधिक नहीं होना चाहिए। यह नियम छोटे बच्चों को डिजिटल थकान से बचाने के लिए बनाया गया है।
  • इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) के मानक: भारत के प्रमुख बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार:
    • 2 वर्ष से कम: ‘जीरो स्क्रीन टाइम’ (सिवाय वीडियो कॉल के)।
    • 2-5 वर्ष: अधिकतम 1 घंटा, वह भी उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षिक कंटेंट के साथ।
  • डिजिटल इंडिया और स्वास्थ्य: सरकार का ‘डिजिटल उपवास’ (Digital Fasting) और स्कूलों में ‘नो गैजेट जोन’ का विचार स्क्रीन एडिक्शन को रोकने की दिशा में एक कदम है।
  • ऑनलाइन सुरक्षा: भारत का डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP Act 2023) टेक कंपनियों को बच्चों के डेटा को ट्रैक करने या उनके व्यवहार को प्रभावित करने वाले ‘टारगेटेड विज्ञापन’ दिखाने से रोकता है।

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