पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम

संदर्भ:
हाल ही में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) कर दिया गया। प्रसिद्ध चिकित्सा पत्रिका द लैंसेट (The Lancet) में प्रकाशित यह बदलाव लगभग 14 वर्षों के व्यापक शोध और दुनिया भर के 22,000 से अधिक मरीजों व स्वास्थ्य विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया पर आधारित है।
PMOS क्या है?
PMOS (पुराना नाम- PCOS) प्रजनन आयु की महिलाओं में होने वाला एक अत्यंत सामान्य, जटिल और दीर्घकालिक विकार है, जो दुनिया भर में हर 8 में से 1 महिला (लगभग 17 करोड़ से अधिक महिलाएं) को प्रभावित करता है। चिकित्सा अनुसंधान के अनुसार, यह एक मल्टी-सिस्टम (बहु-अंगीय) विकार है। इसके नाम के तीन मुख्य शब्दों को समझना आवश्यक है:
- पॉलीएंडोक्राइन (Polyendocrine): यह दर्शाता है कि शरीर में एक से अधिक हॉर्मोनल ग्रंथियां असंतुलित हैं। इसमें मुख्य रूप से एण्ड्रोजन (पुरुष हॉर्मोन) का स्तर बढ़ जाता है, जिससे चेहरे पर अत्यधिक बाल उगना (Hirsutism), गंभीर मुंहासे और बाल झड़ने जैसी समस्याएं होती हैं।
- मेटाबॉलिक (Metabolic): यह इसके चयापचय से जुड़े प्रभाव को दिखाता है। इस बीमारी से पीड़ित 70-80% महिलाओं में इंसुलिन प्रतिरोध (Insulin Resistance) पाया जाता है। इसके कारण तेजी से वजन बढ़ता है, टाइप-2 डायबिटीज, उच्च रक्तचाप (Hypertension) और भविष्य में हृदय रोगों (Cardiovascular Risks) का खतरा बढ़ जाता है।
- ओवेरियन (Ovarian): यह अंडाशय की शिथिलता को दर्शाता है। हॉर्मोनल असंतुलन के कारण अंडे समय पर विकसित या रिलीज नहीं हो पाते, जिससे मासिक धर्म में अनियमितता होती है और यह बांझपन (Infertility) का एक मुख्य कारण बनता है।
नाम बदलने के मुख्य कारण:
- गलत और भ्रामक: पुराने नाम ‘पॉलीसिस्टिक’ से ऐसा प्रतीत होता था कि महिला के अंडाशय में कई खतरनाक गांठें (Cysts) हैं। वैज्ञानिक रूप से, ये कोई वास्तविक गांठें नहीं हैं, बल्कि अपरिपक्व फॉलिकल्स (Immature Follicles) हैं, जो अंडाशय में अंडे रिलीज न होने के कारण एकत्र हो जाते हैं और अल्ट्रासाउंड में सिस्ट जैसे दिखते हैं।
- गलत या देर से निदान: पुराने नाम के कारण कई डॉक्टर और मरीज यह मान लेते थे कि जब तक अल्ट्रासाउंड में सिस्ट न दिखे, तब तक यह बीमारी नहीं है। हकीकत में, कई महिलाओं में सिस्ट न होने के बावजूद गंभीर हॉर्मोनल और मेटाबॉलिक लक्षण होते थे। इस भ्रम के कारण वैश्विक स्तर पर लगभग 70% प्रभावित महिलाओं का सटीक निदान नहीं हो पाता था।
- प्रजनन फोकस से बाहर: ‘PCOS’ नाम इस बीमारी को केवल स्त्री रोग विभाग तक सीमित कर देता था। इससे डॉक्टरों का ध्यान केवल मासिक धर्म को ठीक करने या बांझपन के इलाज पर रहता था। नया नाम ‘PMOS’ यह स्पष्ट करता है कि यह पूरे शरीर की चयापचय प्रणाली से जुड़ा रोग है।
- सामाजिक कलंक: भारत सहित कई पारंपरिक समाजों में ‘ओवेरियन सिंड्रोम’ या प्रजनन अंगों से जुड़े नामों के कारण महिलाएं अपनी बीमारी को छुपाती थीं, क्योंकि इसे सीधे तौर पर शादी और बांझपन से जोड़कर देखा जाता था। इसे ‘मेटाबॉलिक’ (जैसे थायराइड या डायबिटीज) श्रेणी में रखने से इसके प्रति सामाजिक झिझक और कलंक कम होगा।
भारत के लिए महत्व:
भारत में लगभग 16% से 18% महिलाएं इस स्थिति से प्रभावित हैं। भारतीय महिलाओं में अनुवांशिक कारणों से इंसुलिन प्रतिरोध और चयापचय संबंधी विकार होने का जोखिम अधिक होता है।
- यह नया नाम (PMOS) अगले 3 वर्षों में वैश्विक चिकित्सा प्रणालियों और स्वास्थ्य दिशानिर्देशों (ICD Coding) में पूरी तरह लागू हो जाएगा।
- भारत सरकार के राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग (NCD) कार्यक्रम के तहत अब तक मुख्य रूप से मधुमेह और कैंसर पर ध्यान दिया जाता था। PMOS की नई परिभाषा के बाद इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर स्क्रीनिंग में शामिल करना अनिवार्य होगा।