शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-1
संदर्भ:
हाल ही में भारत ने 22 मई 2026 को ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से कम दूरी की मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-1’ (Agni-1) का सफलतापूर्वक परीक्षण-प्रक्षेपण किया है।
- रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सामरिक बल कमान (SFC) के तत्वावधान में आयोजित इस उपयोगकर्ता परीक्षण ने मिसाइल के सभी परिचालन और तकनीकी मापदंडों को पूरी तरह सत्यापित किया है।
अग्नि-1 मिसाइल की मुख्य विशेषताएं:
- श्रेणी: यह सतह से सतह पर मार करने वाली कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM) है।
- मारक क्षमता (रेंज): इसकी मारक क्षमता लगभग 700 से 900 किलोमीटर है, जो इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद सटीक बनाती है।
- प्रणोदन (Propulsion): यह सिंगल-स्टेज (एकल-चरण) मिसाइल है जो ठोस ईंधन (Solid Propellant) तकनीक पर आधारित है।
- पेलोड क्षमता: यह मिसाइल 1,000 किलोग्राम तक के पारंपरिक और परमाणु दोनों प्रकार के हथियारों (Warheads) को ले जाने में सक्षम है।
- गतिशीलता: इसे ‘रोड-मोबाइल लॉन्चर’ (सड़क मार्ग से गतिशील प्लेटफॉर्म) से दागा जा सकता है, जो इसे उच्च गतिशीलता और त्वरित जवाबी कार्रवाई की शक्ति प्रदान करता है।
सामरिक बल कमान (SFC) की भूमिका:
यह परीक्षण भारतीय सेना की सामरिक बल कमान (Strategic Forces Command) द्वारा अपनी नियमित परिचालन तैयारियों के हिस्से के रूप में किया गया। वर्ष 2003 में गठित SFC, भारत के त्रि-स्तरीय परमाणु कमान प्राधिकरण (Nuclear Command Authority – NCA) के आदेशों को क्रियान्वित करने और देश के रणनीतिक परमाणु हथियारों के प्रबंधन व नियंत्रण के लिए उत्तरदायी है।
एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) की पृष्ठभूमि:
अग्नि मिसाइल श्रृंखला का विकास रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) के तहत किया गया था, जिसकी परिकल्पना प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने की थी। 2004 में सेना में शामिल की गई अग्नि-1 इस श्रृंखला का आधार स्तंभ रही है। वर्तमान में भारत के पास अग्नि श्रृंखला की विभिन्न मिसाइलें मौजूद हैं:
- अग्नि-1: शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (700-900 किमी)।
- अग्नि-2 और अग्नि-3: मध्यम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (2,000 से 3,500 किमी से अधिक)।
- अग्नि-4 और अग्नि-5: अंतरमहाद्वीपीय क्षमताओं से लैस लंबी दूरी की मिसाइलें (4,000 से 5,000+ किमी), जिसमें अग्नि-5 हाल ही में MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) तकनीक से भी सुसज्जित की गई है।
महत्व:
- विश्वसनीय न्यूनतम निवारण (Credible Minimum Deterrence): भारत की परमाणु नीति ‘पहले उपयोग नहीं’ (No First Use) के सिद्धांत पर आधारित है। ऐसे में, किसी भी संभावित परमाणु हमले के खिलाफ एक अचूक और त्वरित जवाबी कार्रवाई सुनिश्चित करने में अग्नि-1 जैसी मोबाइल-लॉन्च मिसाइलें अत्यंत प्रभावी हैं।
- परिचालन तत्परता का सत्यापन: यह एक विकासात्मक परीक्षण न होकर एक ‘उपयोगकर्ता परीक्षण’ है। इससे यह प्रमाणित होता है कि दो दशकों से सेवा में होने के बावजूद यह प्रणाली वास्तविक युद्ध स्थितियों में अत्यधिक विश्वसनीय और सटीक है।
- क्षेत्रीय भू-राजनीतिक संतुलन: दक्षिण एशिया में बदलती सुरक्षा चुनौतियों और सीमा पार से उत्पन्न खतरों के संदर्भ में, यह मिसाइल भारत की त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया क्षमता को सुदृढ़ कर क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाए रखती है।
