Sixth generation fighter aircraft

संदर्भ:
हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने संसद की स्थायी समिति को सूचित किया कि भारत अपनी वायु सेना की भविष्य की मारक क्षमता को मजबूत करने के लिए यूरोप के साथ छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान (Sixth-Generation Fighter Jet) के विकास में सहयोग करने पर विचार कर रहा है।
छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान (6th-Generation Fighter Jet):
- परिचय: छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान वे उन्नत हवाई प्लेटफार्म हैं जो ‘सिस्टम ऑफ सिस्टम्स’ अवधारणा पर आधारित हैं। ये विमान केवल एक लड़ाकू मशीन नहीं, बल्कि एक उड़ता हुआ डेटा सेंटर और कमांड सेंटर होते हैं जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अत्यधिक स्टील्थ, और मानव-मानवरहित टीमिंग (MUM-T) का उपयोग करते हैं।
- विशेषताएं (Key Features):
- वैकल्पिक रूप से मानवयुक्त (Optionally Manned): ये विमान पायलट के साथ या पूरी तरह से स्वायत्त (Autonomous) मोड में उड़ सकते हैं।
- लॉयल विंगमैन (Loyal Wingman): ये जेट अकेले नहीं लड़ते, बल्कि ड्रोन स्वार्म के साथ काम करते हैं जो उनके आदेश पर हमला या बचाव करते हैं।
- डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स (DEW): इनमें मिसाइलों के साथ लेजर हथियार लगे होते हैं जो प्रकाश की गति से दुश्मन को नष्ट कर सकते हैं।
- अडैप्टिव इंजन टेक्नोलॉजी: ये इंजन अलग-अलग मिशन के अनुसार अपनी शक्ति और ईंधन खपत को समायोजित कर सकते हैं।
- अत्यधिक स्टील्थ: ये रडार के साथ-साथ ‘हीट-सीकिंग’ मिसाइलों के लिए भी लगभग अदृश्य होते हैं।
विश्व में वर्तमान स्थिति:
वर्तमान में कोई भी देश छठी पीढ़ी के विमान को पूर्णतः संचालित नहीं कर रहा है, लेकिन कई देश प्रोटोटाइप और परीक्षण के चरण में हैं:
- अमेरिका: ‘Next Generation Air Dominance’ (NGAD) कार्यक्रम के तहत Boeing F-47 और F/A-XX पर काम कर रहा है।
- चीन: दो अलग-अलग छठी पीढ़ी के कार्यक्रमों पर काम कर रहा है और हाल ही में इसके विजुअल्स भी जारी किए हैं।
- यूरोपीय कंसोर्टियम:
- GCAP: ब्रिटेन, इटली और जापान (Project Tempest)।
- FCAS: फ्रांस, जर्मनी और स्पेन।
- रूस: MiG-41 (Stealth Interceptor) विकसित कर रहा है।
भारत की वर्तमान स्थिति:
- स्वदेशी 5वीं पीढ़ी (AMCA): भारत का मुख्य ध्यान Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) पर है, जिसके 5 प्रोटोटाइप 2031 तक तैयार होने की उम्मीद है और 2035 से सेना में शामिल होने की योजना है।
- छठी पीढ़ी का सहयोग: मार्च 2026 की जानकारी के अनुसार, भारत सरकार और वायु सेना यूरोपीय कंसोर्टियम (GCAP या FCAS) में से किसी एक में शामिल होने की संभावना तलाश रहे हैं।
- तकनीकी विकास: DRDO की ‘रिसर्च सेंटर इमारत’ (RCI) क्वांटम एवियोनिक्स और AI जैसी तकनीकों पर काम कर रही है, जो छठी पीढ़ी के लिए अनिवार्य हैं।
- नोट: वर्तमान में भारतीय वायु सेना के पास मुख्य रूप से 4 और 4.5 पीढ़ी के विमान (जैसे Rafale, Sukhoi-30MKI, Tejas) हैं। भविष्य की जरूरतों के लिए भारत फ्रांस के साथ मिलकर एक शक्तिशाली 110-120 KN इंजन भी विकसित कर रहा है।