सोमनाथ मंदिर

संदर्भ:
हाल ही में 11 मई 2026 को स्वतंत्र भारत में सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार और प्राण-प्रतिष्ठा की 75वीं वर्षगांठ (Somnath Amrit Parv) मनाई गई।
सोमनाथ मंदिर के बारे में:
- परिचय: सोमनाथ मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम (आदि ज्योतिर्लिंग) माना जाता है। ऋग्वेद और स्कंद पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसका उल्लेख ‘प्रभास क्षेत्र’ के रूप में मिलता है।
- महमूद गजनवी (1026 ईस्वी): मंदिर पर सबसे विनाशकारी आक्रमण महमूद गजनवी द्वारा किया गया था। वर्ष 2026 इस घटना के 1000 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है, जिसे सरकार ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के रूप में मना रही है।
- अन्य आक्रमण: दिल्ली सल्तनत के अलाउद्दीन खिलजी (1297), जफर खान (1394) और अंततः मुगल शासक औरंगजेब (1706) ने इसे बार-बार नष्ट किया।
- अहिल्याबाई होल्कर (1782): प्रतिकूल राजनीतिक स्थितियों में पूजा जारी रखने के लिए इंदौर की महारानी ने मूल स्थान के निकट एक छोटा मंदिर बनवाया था।
- आधुनिक पुनरुद्धार (1947–1951): स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ का पुनर्निर्माण भारत के “सांस्कृतिक पुनर्जागरण” का अध्याय बना:
- सरदार पटेल का संकल्प: 13 नवंबर 1947 को जूनागढ़ की मुक्ति के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसके जीर्णोद्धार का संकल्प लिया।
- गांधीजी का आदर्श: महात्मा गांधी ने सुझाव दिया कि निर्माण के लिए सरकारी खजाने के बजाय जनता के दान का उपयोग किया जाए। फलस्वरूप, श्री सोमनाथ ट्रस्ट का गठन हुआ।
- K.M. मुंशी का योगदान: पटेल की मृत्यु के बाद के.एम. मुंशी ने कार्यभार संभाला। उन्होंने ‘सोमनाथ: द श्राइन इटरनल’ पुस्तक के माध्यम से इसके महत्व को वैश्विक मंच पर रखा।
- उदघाटन: तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्राण-प्रतिष्ठा में जाने का विरोध किया था, इसे ‘हिंदू पुनरुत्थानवाद’ करार दिया। हालांकि, डॉ. प्रसाद ने इसे राष्ट्रीय गौरव का विषय मानते हुए 11 मई 1951 को मंदिर का उद्घाटन किया।
- स्थापत्य कला: वर्तमान मंदिर का निर्माण प्रसिद्ध वास्तुकार प्रभाशंकर सोमपुरा द्वारा किया गया है।
- शैली: यह ‘कैलाश महामेरु प्रसाद’ रूप में चालुक्य (सोलंकी/मारू-गुर्जर) शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है।
- संरचना: इसमें गर्भगृह, सभा मंडप और नृत्य मंडप शामिल हैं। इसका शिखर 155 फीट ऊंचा है और इसके ऊपर 10 टन वजनी कलश स्थापित है।
- बाण स्तंभ (Baan Stambh): यह मंदिर के दक्षिण में स्थित एक अनूठा स्तंभ है। इस पर खुदा शिलालेख बताता है कि इस बिंदु से लेकर दक्षिण ध्रुव (Antarctica) तक समुद्र के बीच कोई भी भू-भाग नहीं है।
- प्रसाद योजना (PRASHAD Scheme): केंद्र सरकार की इस योजना के तहत मंदिर परिसर में अत्याधुनिक पर्यटक सुविधाएं, प्रकाश एवं ध्वनि शो और आध्यात्मिक कॉरिडोर का विकास किया गया है।
- सतत प्रबंधन: मंदिर वर्तमान में शून्य अपशिष्ट (Zero Waste) प्रबंधन और सौर ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से ‘मिशन LiFE’ का पालन कर रहा है।