वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II | Vibrant Village Programme-II

संदर्भ:
हाल ही में, जम्मू और कश्मीर के कठुआ जिले के छह रणनीतिक सीमावर्ती गांवों को केंद्र सरकार के ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II’ (VVP-II) में शामिल किया गया। इसमें बोबिया (Bobiya), कड्याला (Kadyala), गजराल (Gajnal), करोल कृष्णा (Karol Krishna), रठुआ (Rathua), गुज्जर चक (Gujjar Chak) शामिल हैं। ये सभी गांव अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास स्थित हैं।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II क्या है?
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP) भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी और रणनीतिक पहल है, जिसे भारत की सीमाओं की सुरक्षा और वहां रहने वाले समुदायों के उत्थान के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- अप्रैल 2025 में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II (VVP-II) को मंजूरी दी थी। यह कार्यक्रम “अंतिम गांव” की अवधारणा को बदलते हुए उन्हें देश का “प्रथम गांव” बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
- VVP-I को मुख्य रूप से चीन के साथ लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर केंद्रित किया गया था। हालाँकि, सुरक्षा चुनौतियों की व्यापकता को देखते हुए VVP-II के दायरे को बढ़ाकर इसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे गांवों को भी शामिल किया गया है।
- यह कार्यक्रम ‘हब एंड स्पोक मॉडल’ और ‘संतृप्ति’ (Saturation) के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि केंद्र की सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ इन गांवों के प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचे।
वित्तीय संरचना और अवधि:
- प्रकार: यह एक ‘सेंट्रल सेक्टर स्कीम’ (Central Sector Scheme) है, जिसका अर्थ है कि इसका 100% वित्तपोषण केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है।
- परिव्यय: VVP-II के लिए ₹6,839 करोड़ का कुल वित्तीय आवंटन किया गया है।
- कार्यकाल: यह योजना वित्त वर्ष 2024-25 से 2028-29 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए लागू है।
भौगोलिक कवरेज:
VVP-II का दायरा अत्यंत विशाल है। इसमें 15 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 1,954 गांवों को शामिल किया गया है। प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं:
- उत्तर-पश्चिम: लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात।
- उत्तर: हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार।
- उत्तर-पूर्व: सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय और त्रिपुरा।
कार्यक्रम के मुख्य स्तंभ:
- बुनियादी ढांचा (Infrastructure): हर मौसम के लिए उपयुक्त सड़कें (All-weather roads), पेयजल आपूर्ति और बेहतर स्वास्थ्य केंद्र।
- आवास: ‘पीएम आवास योजना’ के माध्यम से सीमावर्ती निवासियों को पक्के मकानों की सुविधा।
- कनेक्टिविटी: 4G और 5G मोबाइल नेटवर्क के साथ-साथ दूरदर्शन और शिक्षा चैनलों (Swayam Prabha) की पहुंच सुनिश्चित करना।
- ऊर्जा: सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों के माध्यम से 24×7 बिजली।
- पर्यटन: सीमावर्ती पर्यटन (Border Tourism) को बढ़ावा देना ताकि बाहरी दुनिया इन क्षेत्रों की संस्कृति को देख सके।
- आजीविका: स्थानीय हस्तशिल्प, कृषि और बागवानी के लिए ‘वन विलेज वन प्रोडक्ट’ (OVOP) को लागू करना।
- सहकारिता: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सहकारी समितियों के माध्यम से महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाना।
महत्व:
- पलायन रोकना (Anti-Migration): बुनियादी सुविधाओं के अभाव में सीमावर्ती लोग शहरों की ओर पलायन करते हैं, जिससे सीमाएं “मानव रहित” हो जाती हैं। VVP-II इस शून्य को भरकर सुरक्षा मजबूत करता है।
- सुरक्षा बलों के साथ समन्वय: इन गांवों के निवासी भारतीय सेना और BSF के लिए “सूचना तंत्र” (Intelligence Assets) के रूप में कार्य करते हैं। एक खुशहाल और संपन्न गांव राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है।
- सीमा पार दुष्प्रचार का मुकाबला: सीमा पार से होने वाले प्रोपेगेंडा को रोकने के लिए इन क्षेत्रों का विकास और वहां भारतीय पहचान को सुदृढ़ करना अनिवार्य है।