PRASHAST मोबाइल एप्लिकेशन

संदर्भ:
NCERT ने हाल ही में समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) को बढ़ावा देने के लिए PRASHAST 2.0 (Pre-Assessment Holistic Screening Tool) मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया।
PRASHAST क्या हैं?
PRASHAST का पूर्ण रूप ‘Pre-Assessment Holistic Screening Tool’ (पूर्व-आकलन समग्र स्क्रीनिंग टूल) है। यह एक उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लिकेशन है जिसे NCERT ने विकसित किया है। यह स्कूलों में बच्चों के बीच दिव्यांगता की प्रारंभिक पहचान के लिए एक डिजिटल चेकलिस्ट के रूप में कार्य करता है।
- मंत्रालय: शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education), भारत सरकार।
- नोडल विभाग: स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL)।
- विकासकर्ता संस्थान: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की घटक इकाई, केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (CIET)।
मुख्य उद्देश्य:
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शीघ्र पहचान (Early Identification): स्कूली स्तर पर ही दिव्यांगताओं की पहचान करना ताकि समय पर हस्तक्षेप किया जा सके।
- खाई को पाटना: शिक्षकों द्वारा किए गए कक्षा अवलोकन और औपचारिक चिकित्सा प्रमाणन के बीच की दूरी को कम करना।
- डेटा एकीकरण: नीति निर्माण के लिए एक व्यापक और साक्ष्य-आधारित डिजिटल डेटा इकोसिस्टम तैयार करना।
- NEP 2020 का कार्यान्वयन: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के ‘कोई भी बच्चा पीछे न छूटे’ (No Child Left Behind) के दृष्टिकोण को साकार करना।
प्रमुख विशेषताएं:
- 21 प्रकार की दिव्यांगताएं: यह ऐप दिव्यांगजन अधिकार (RPwD) अधिनियम, 2016 में सूचीबद्ध सभी 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को कवर करता है।
- दो-चरणीय स्क्रीनिंग प्रक्रिया (Two-Step Screening):
- भाग-1: कक्षा शिक्षक द्वारा अवलोकन के आधार पर प्रारंभिक स्क्रीनिंग।
- भाग-2: विशेष शिक्षकों (Special Educators) द्वारा आगे का मूल्यांकन।
- डिजिटल एकीकरण: यह UDISE+, APAAR ID, और स्वावलंबन कार्ड (UDID) पोर्टल के साथ सहज रूप से एकीकृत है।
- भूमिका आधारित एक्सेस: इसमें स्कूल प्रमुखों, नियमित शिक्षकों और विशेष शिक्षकों के लिए अलग-अलग लॉगिन और डैशबोर्ड की सुविधा है।
- रिपोर्ट जेनरेशन: यह स्कूल-स्तरीय रिपोर्ट और डेटा एनालिटिक्स प्रदान करता है, जिससे प्रमाणन प्रक्रिया तेज होती है।
- व्यापक पहुँच: यह सरकारी, निजी, विशेष विद्यालयों और होम-स्कूलिंग वाले बच्चों के लिए उपलब्ध है।
महत्व:
- समावेशी विकास (Inclusive Growth): यह प्लेटफॉर्म SDG-4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) और ‘समानता’ के संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देता है।
- शासन में तकनीक (E-Governance): शिक्षा क्षेत्र में डेटा-संचालित निर्णय लेने और पारदर्शिता लाने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- सामुदायिक सशक्तिकरण: यह शिक्षकों को प्रशिक्षित करता है कि वे बच्चों के व्यवहारिक और सीखने संबंधी संकेतों को पहचान सकें, जो अक्सर अनदेखे रह जाते हैं।
- समग्र शिक्षा योजना: इसके माध्यम से पहचाने गए बच्चों को समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) के तहत सहायता, सहायता उपकरण और चिकित्सा सहयोग प्रदान किया जाता है।