Siang Upper Multipurpose Project का विरोध, जानिए प्रोजेक्ट के लाभ एवं चिंताएं
संदर्भ:
हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (Siang Upper Multipurpose Project) के सर्वेक्षण कार्यों के खिलाफ स्थानीय आदि समुदाय और विभिन्न संगठनों का तीव्र एवं हिंसक विरोध प्रदर्शन (Arunachal Pradesh Dam Protest 2026) देखा गया।

सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना के बारे में:
- परिचय: सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (Siang Upper Multipurpose Project – SUMP) भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर प्रस्तावित एक विशाल मेगा-हाइड्रोपावर और जल भंडारण अवसंरचना है। यह परियोजना वर्तमान में अपने प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट (PFR) तथा भू-तकनीकी सर्वेक्षण के चरण में है।
- नदी प्रणाली: यह परियोजना ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन (Brahmaputra River Basin) का हिस्सा है।
- तिब्बत में ‘यारलंग सांगपो’ (Yarlung Tsangpo) के नाम से बहने वाली नदी जब भारत के अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है, तो इसे सियांग नदी (Siang River) कहा जाता है, जो आगे चलकर असम में ब्रह्मपुत्र बनती है।
- प्रस्तावित स्थल: यह बांध मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग और सियांग जिलों के अंतर्गत गेकू (Geku), पारोंग और दाईते दिमे (Dite Dime) जैसे संभावित स्थलों पर बनाने के लिए विचाराधीन है।
- नोडल संस्था: इस विशालकाय परियोजना का उत्तरदायित्व भारत सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NHPC Limited) को सौंपा गया है।
- अनुमानित लागत: प्रारंभिक आकलनों के अनुसार, इस मेगा परियोजना के निर्माण पर लगभग $13 बिलियन (लगभग ₹1.10 लाख करोड़) की भारी पूंजीगत लागत आने का अनुमान है।
- विशेषताएं (Features):
- अभूतपूर्व स्थापित क्षमता: इस परियोजना की कुल प्रस्तावित बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 11,200 मेगावाट (11.2 GW) है, जो इसे भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना (Siang Hydropower Project) बनाती है।
- विशाल जल भंडारण (Reservoir Capacity): इसके तहत नदी के तल से लगभग 300 मीटर ऊंचे एक विशालकाय बांध का निर्माण प्रस्तावित है। इसका जलाशय लगभग 9.2 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) या 320 TMCFT पानी का जीवंत भंडारण (Live Storage) करने में सक्षम होगा।
SUMP परियोजना के संभावित लाभ (SUMP Project Benefits):
- रणनीतिक जल-कूटनीति (Strategic Water Diplomacy): चीन द्वारा तिब्बत के मेडोग काउंटी में ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाए जा रहे 60,000 मेगावाट के महा-बांध (China Medog Dam Project) का मुकाबला करने के लिए भारत के पास जल संप्रभुता (Water Sovereignty) स्थापित करने का यह एकमात्र प्रभावी साधन है।
- बाढ़ नियंत्रण और गाद प्रबंधन (Siang Dam Flood Control): यह विशाल जलाशय असम और अरुणाचल प्रदेश के निचले इलाकों में मानसून के दौरान आने वाली विनाशकारी बाढ़ की तीव्रता को काफी कम करेगा तथा नदी के कटाव को रोकेगा।
- स्वच्छ और हरित ऊर्जा उत्पादन (Clean Energy Hub): यह परियोजना भारत के वार्षिक कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगी और उत्तर-पूर्वी ग्रिड की पीक-लोड़ बिजली की कमी को दूर करते हुए देश को 47 बिलियन यूनिट (kWh) वार्षिक अक्षय ऊर्जा प्रदान करेगी।
- अल्प-वर्षा ऋतु में जल सुरक्षा (Siang River Water Security): यदि चीन भविष्य में यारलंग सांगपो के प्राकृतिक प्रवाह को मोड़ता है या बाधित करता है, तो यह संचित जलाशय असम और अरुणाचल प्रदेश में कृषि सिंचाई और पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
- क्षेत्रीय आर्थिक विकास (Arunachal Pradesh Hydropower): 15 से 20 वर्षों के निर्माण काल के दौरान इस परियोजना से पूर्वोत्तर में व्यापक बुनियादी ढांचे का विकास, रोजगार के हजारों अवसर और राज्य सरकार के लिए भारी मात्रा में राजस्व (Free Power Royalty) सृजित होगा।
स्थानीय समुदायों की चिंताएं एवं विरोध के कारण:
- पुश्तैनी भूमि और विस्थापन का डर (Siang Project Displacement Concerns): क्षेत्र के मूल निवासी आदि जनजाति (Adi Tribe) को आशंका है कि इस विशालकाय बांध के जलाशय के कारण उनके सैकड़ों गांव, पुश्तैनी कृषि भूमि और पारंपरिक शिकार क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो जाएंगे।
- सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय खतरा: आदि समुदाय का सियांग नदी (Siang River) के साथ गहरा सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक संबंध है। वे इसे अपनी जीवनदायिनी मानते हैं। बड़े पैमाने पर बाहरी कार्यबलों के आने से उनकी अद्वितीय जनजातीय संस्कृति के प्रभावित होने का भय है।
- हिमालयी पारिस्थितिकी पर प्रभाव (Siang Dam Environmental Impact): यह परियोजना पूर्वी हिमालय के एक अत्यधिक संवेदनशील और समृद्ध जैव विविधता वाले हॉटस्पॉट में प्रस्तावित है। बांध बनने से वन्यजीव गलियारे बाधित होंगे और नदी के प्राकृतिक जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुंचेगा।
- उच्च भूकंपीय संवेदनशीलता (Seismic Vulnerability): यह संपूर्ण क्षेत्र भूकंपीय क्षेत्र-V (Zone-V) के अंतर्गत आता है। स्थानीय लोगों और भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि भूकंप या हिमस्खलन के कारण यदि 300 मीटर ऊंचा बांध टूटता है, तो यह निचले अरुणाचल और असम के लिए प्रलयकारी सिद्ध होगा।
- पारंपरिक परामर्श का अभाव (Lack of Consultation): प्रदर्शनकारी संगठनों (जैसे सियांग इंडीजीनस फार्मर्स फोरम – SIFF) का आरोप है कि सरकार स्थानीय पारंपरिक शासन परिषदों, जिन्हें ‘केबांग’ (Kebang Councils) कहा जाता है, को भरोसे में लिए बिना जबरन सर्वेक्षण करवा रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP) क्या है?
उत्तर: यह अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर NHPC द्वारा प्रस्तावित एक 11,200 मेगावाट की विशाल जलविद्युत और जल भंडारण परियोजना है।
प्रश्न 2: सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना का निर्माण कहां प्रस्तावित है?
उत्तर: यह भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य के अपर सियांग और सियांग जिलों में गेकू गांव के समीप निर्मित होना प्रस्तावित है।
प्रश्न 3: अरुणाचल प्रदेश में स्थानीय समुदाय सियांग परियोजना का विरोध क्यों कर रहे हैं?
उत्तर: स्थानीय आदि जनजाति विस्थापन के डर, पुश्तैनी जमीनों के डूबने, सांस्कृतिक पहचान को खतरे और गंभीर पर्यावरणीय नुकसान के कारण इसका तीव्र विरोध कर रही है।
प्रश्न 4: सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना से भारत को क्या संभावित लाभ होंगे?
उत्तर: इससे भारत को 11.2 GW हरित ऊर्जा मिलेगी, असम में बाढ़ नियंत्रण होगा और चीन के मेडोग बांध के खिलाफ रणनीतिक जल सुरक्षा प्राप्त होगी।
प्रश्न 5: सियांग बांध परियोजना से पर्यावरण और स्थानीय जनजातियों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर: इससे हिमालयी जैव विविधता नष्ट हो सकती है, भूकंपीय खतरा बढ़ सकता है और स्वदेशी समुदायों (Indigenous Communities) को अपनी पैतृक भूमि से विस्थापित होना पड़ सकता है।