Assamese festival Rangali Bihu
संदर्भ:
असमिया कैलेंडर के पहले महीने ‘बोहाग’ (अप्रैल) की शुरुआत के साथ, 5 अप्रैल 2026 से असम में रंगाली बिहू या बोहाग बिहू का हर्षोल्लास शुरू हो चुका है।
रंगाली बिहू के बारे मे:
- परिचय: रंगाली बिहू, जिसे ‘बोहाग बिहू’ के नाम से भी जाना जाता है, असम का सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और कृषि उत्सव है। यह पर्व असमिया नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।
- सांस्कृतिक चक्र: रंगाली बिहू को ‘सात बिहू’ भी कहा जाता है, जहाँ प्रत्येक दिन का एक विशिष्ट अनुष्ठानिक महत्व होता है:
- गोरु बिहू (14 अप्रैल): यह दिन मवेशियों को समर्पित है। सुबह पशुओं को नदी या तालाब में ले जाकर हल्दी और उड़द की दाल (माह-हलोधी) के लेप से नहलाया जाता है। उन्हें ‘लाउ-बेंगुन’ (लौकी और बैंगन) खिलाया जाता है और पुरानी रस्सी को बदलकर नई रस्सी बांधी जाती है।
- मानुह बिहू (15 अप्रैल): यह असमिया नव वर्ष का पहला दिन है। लोग स्नान कर नए कपड़े पहनते हैं और बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं। इस दिन उपहार के रूप में ‘गमोसा’ (बिहुवान) का आदान-प्रदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
- गोसाईं बिहू: घरों और ‘नामघरों’ (प्रार्थना घरों) में देवी-देवताओं की पूजा की जाती है।
- कुटुम बिहू: यह दिन विशेष रूप से रिश्तेदारों और मित्रों से मिलने और सामाजिक बंधनों को मजबूत करने के लिए होता है।
- अन्य दिन: मेला बिहू, सतेरा बिहू और चेरा बिहू उत्सव के समापन तक मेलों और सामुदायिक आयोजनों के माध्यम से जारी रहते हैं।
- सांस्कृतिक तत्व:
- बिहू नृत्य: यह एक जीवंत और ऊर्जावान लोक नृत्य है, जो अपने त्वरित कदमों और हाथों की मुद्राओं के लिए प्रसिद्ध है। हाल ही में, असम ने एक ही स्थान पर सबसे बड़े बिहू नृत्य प्रदर्शन के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया है।
- पारंपरिक वाद्ययंत्र: नृत्य के साथ ‘ढोल’ (पारंपरिक ड्रम), ‘पेपा’ (भैंस के सींग से बना वाद्ययंत्र), ‘गोगोना’ (बांस का वाद्ययंत्र), ‘ताल’ और ‘तोका’ बजाए जाते हैं।
- परिधान: महिलाएं सुनहरे ‘मुगा रेशम’ की ‘मेखेला चादर’ पहनती हैं और हाथों में ‘जेतुका’ (मेहंदी) लगाती हैं। पुरुष ‘धोती’ और ‘गमोसा’ पहनते हैं।
- प्रतीक चिन्ह: ‘गमोसा’ असमिया पहचान का वैश्विक प्रतीक बन चुका है, जिसे 2022 में GI टैग (Geographical Indication) भी प्राप्त हुआ था।
- व्यंजन:
- पीठा: तिल पीठा, घिला पीठा और सुतली पीठा जैसे चावल के केक प्रमुख हैं।
- लारू: नारियल और गुड़ से बने लड्डू।
- जोलपान: दही, चिरा (पोहा), और गुड़ का पारंपरिक नाश्ता जो मेहमानों को परोसा जाता है।
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रंगाली बिहू भारत के अन्य हिस्सों में मनाए जाने वाले नव वर्ष त्योहारों के साथ मेल खाता है, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता में निहित एकता को दर्शाता है:
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