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न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ समिति रिपोर्ट

Justice Kurian Joseph Committee Report

Justice Kurian Joseph Committee Report

संदर्भ:

हाल ही में केंद्र-राज्य संबंधों पर न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ समिति ने जीएसटी 2.0 की वकालत करते हुए एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि मौजूदा जीएसटी ढांचे ने राज्यों की राजकोषीय स्वायत्तता को कमजोर कर दिया है।

GST 2.0 पर न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ समिति की रिपोर्ट:

  • GST परिषद का पुनर्गठन (Article 279A):
    • वीटो पावर में कमी: वर्तमान में केंद्र के पास 33.33% वोट शेयर है, जो प्रभावी रूप से उसे वीटो देता है। समिति ने केंद्र के वोट शेयर को घटाकर 20% करने और राज्यों के सामूहिक भार को 80% तक बढ़ाने की सिफारिश की है।
    • कोरम और मतदान: परिषद के कोरम को बढ़ाकर कुल सदस्यों का दो-तिहाई करने का प्रस्ताव है।
    • परामर्शकारी प्रकृति: सर्वोच्च न्यायालय के मोहित मिनरल्स (2022) निर्णय का हवाला देते हुए, समिति ने स्पष्ट किया है कि GST परिषद की सिफारिशें केवल सलाहकारी (Advisory) होनी चाहिए, बाध्यकारी नहीं। 
  • कर दरों का युक्तिकरण (Rate Rationalisation):
  • तीन-स्तरीय स्लैब: वर्तमान जटिल ढांचे के स्थान पर 5%, 18%, और 40% (डिमैरिट गुड्स के लिए) की सरल व्यवस्था का सुझाव दिया गया है।
  • लचीलापन: राज्यों को उनके SGST (State GST) दरों में ±2% के बैंड के भीतर बदलाव करने की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि वे अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार राजस्व जुटा सकें।
  • वार्षिक कैलेंडर: कर दरों में बार-बार बदलाव के बजाय एक वार्षिक दर कैलेंडर (Annual Rate Calendar) लागू करने का प्रस्ताव है, जो प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल से प्रभावी हो। 
  • संस्थागत सुधार:
  • स्वतंत्र सचिवालय: परिषद के कामकाज को केंद्र के प्रभुत्व से मुक्त करने के लिए एक स्वतंत्र GST परिषद सचिवालय की स्थापना।
  • विवाद समाधान प्राधिकरण (DSA): कर विवादों के त्वरित निपटान के लिए एक वैधानिक GST विवाद निपटान प्राधिकरण बनाने का सुझाव, जिसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें।
  • पेट्रोलियम उत्पाद: संरचनात्मक कमियों को दूर किए जाने तक पेट्रोलियम उत्पादों को GST के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की गई है। 

न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ समिति के बारे में:

  • परिचय: इस समिति का गठन तमिलनाडु सरकार द्वारा भारत के राजकोषीय और राजनीतिक संघवाद (Fiscal and Political Federalism) के पुनर्निर्माण के लिए किया गया था। 
  • गठन: 15 अप्रैल, 2025 (तमिलनाडु सरकार द्वारा)।
  • अध्यक्ष: न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ (सेवानिवृत्त न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय)।
  • सदस्य: अशोक वर्धन शेट्टी (सेवानिवृत्त IAS अधिकारी) और डॉ. एम. नागनाथन (प्रसिद्ध अर्थशास्त्री)।
  • उद्देश्य: भारतीय संविधान के संघीय ढांचे की समीक्षा करना और राज्यों की स्वायत्तता को प्रभावित करने वाले ‘केंद्रीकरण’ के मुद्दों पर समाधान देना।

समिति के प्रमुख कार्य और सुझाव:

  • राज्यपाल की शक्तियों पर अंकुश: राज्यपालों के लिए राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर निर्णय लेने हेतु 15 दिनों की निश्चित समय सीमा अनिवार्य की जाए।

      • कुलाधिपति पद: राज्यपालों को राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति (Chancellor) के पद से पूरी तरह हटाया जाए।
      • कार्यकाल: राज्यपाल का कार्यकाल 5 वर्ष के लिए निश्चित हो और उन्हें केंद्र द्वारा मनमाने ढंग से हटाया न जा सके।
  • शक्तियों का पुनर्वितरण (Lists Re-balancing): शिक्षा को ‘समवर्ती सूची’ (Concurrent List) से हटाकर पुनः ‘राज्य सूची’ में शामिल करने का सुझाव।

  • NEET/NExT का विरोध: राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं (जैसे NEET) को अनिवार्य बनाने के बजाय राज्यों को अपनी प्रवेश प्रक्रिया चुनने की स्वतंत्रता दी जाए।
  • अनुच्छेद 356 और 365 का दुरुपयोग: समिति ने अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) के उपयोग को केवल ‘अंतिम विकल्प’ के रूप में रखने और इसकी न्यायिक समीक्षा को और कड़ा करने का सुझाव दिया है।

  • संसदीय परिसीमन (Delimitation): लोकसभा सीटों के आवंटन में राज्यों की जनसंख्या नियंत्रण की सफलता को ‘दंड’ न मिले, इसके लिए परिसीमन को वर्ष 2126 तक स्थगित रखने की सिफारिश की गई है।

  • राजकोषीय स्वायत्तता: उपकर (Cess) और अधिभार (Surcharge) से प्राप्त आय को विभाज्य पूल (Divisible Pool) का हिस्सा बनाया जाए ताकि राज्यों को उनका उचित हिस्सा मिल सके।

 

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