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भारत की Carbon Credit Trading Scheme, CBAM के तहत ब्रिटेन ने दी मान्यता

भारत की Carbon Credit Trading Scheme, CBAM के तहत ब्रिटेन ने दी मान्यता

India Carbon Credit Trading Scheme

संदर्भ:

हाल ही में यूनाइटेड किंगडम (UK) ने भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (Carbon Credit Trading Scheme – CCTS) को आधिकारिक मान्यता दी। 

  • इस निर्णय के तहत, ब्रिटेन के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (Carbon Border Adjustment Mechanism – CBAM) के अंतर्गत भारतीय निर्यातकों को दोहरे कार्बन टैक्स से बड़ी राहत मिलेगी।

कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (Carbon Credit Trading Scheme) क्या हैं?

  • परिचय: Carbon Credit Trading Scheme भारत का एक राष्ट्रीय बाजार-आधारित ढांचा (Market-based Framework) है, जिसे भारतीय कार्बन बाजार (Indian Carbon Market – ICM) को स्थापित करने के लिए अधिसूचित किया गया है।
    • इसके अंतर्गत ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन पर एक मौद्रिक मूल्य (Monetary Value) निर्धारित किया जाता है तथा उत्सर्जन में कमी के बदले व्यापार योग्य कार्बन क्रेडिट सर्टिफिकेट (Carbon Credit Certificates – CCC) जारी किए जाते हैं।
  • शुरुआत: भारत सरकार द्वारा इस योजना को पहली बार जून 2023 में अधिसूचित किया गया था, तथा विस्तृत अनुपालन नियमों को जुलाई 2024 में अपनाया गया। 
  • कानूनी ढांचा: इस योजना का विधिक आधार ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 (Energy Conservation Amendment Act, 2022) है, जिसने केंद्र सरकार को कार्बन ट्रेडिंग योजना निर्दिष्ट करने की शक्ति प्रदान की। 
  • लक्ष्य:
    • डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonization): भारतीय अर्थव्यवस्था के ऊर्जा-गहन औद्योगिक क्षेत्रों को तेजी से निम्न-कार्बन उत्सर्जन मॉडल में परिवर्तित करना।
    • एनडीसी लक्ष्यों की प्राप्ति: पेरिस समझौते (Paris Agreement) के तहत भारत के ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (NDCs) के लक्ष्यों को समय सीमा के भीतर पूरा करना।
    • PAT योजना से परिवर्तन: यह पूर्ववर्ती परफॉर्म, अचीव एंड ट्रेड (PAT) योजना का उन्नत रूप है, जो केवल ऊर्जा दक्षता पर केंद्रित थी। सीसीटीएस (CCTS) सीधे तौर पर उत्सर्जन तीव्रता (Emission Intensity) को लक्षित करता है। 
  • नोडल संस्थाएं:
    • नियामक समिति: राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कार्बन बाजार राष्ट्रीय संचालन समिति (NSCICM) इसकी नीतिगत निगरानी करती है, जिसकी सह-अध्यक्षता विद्युत मंत्रालय और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा की जाती है।
    • प्रशासक: विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency – BEE) इस योजना का मुख्य प्रशासक और कार्यान्वयनकर्ता है।
    • रजिस्ट्री ऑपरेटर: ‘ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया’ (Grid Controller of India) राष्ट्रीय कार्बन रजिस्ट्री का संचालन करता है।
    • बाजार नियामक: ‘केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग’ (CERC) इस व्यापारिक गतिविधियों का नियमन करता है। 
  • विशेषताएं:
  • अनुपालन बाजार (Compliance Market): इसके तहत चिन्हित क्षेत्रों (जैसे एल्युमीनियम, सीमेंट, रिफाइनरी, टेक्सटाइल, पेट्रोकेमिकल्स आदि) की कंपनियों के लिए सरकार उत्सर्जन तीव्रता का एक कानूनी रूप से बाध्यकारी लक्ष्य तय करती है। लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को प्रति टन CO₂ समतुल्य कमी पर एक सीसीसी (CCC) मिलता है, जिसे वे कम प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को बेच सकती हैं।
  • स्वैच्छिक ऑफसेट तंत्र (Voluntary Offset Mechanism): गैर-बाध्यकारी संस्थाएं भी पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं के माध्यम से कार्बन क्रेडिट (Carbon Credit India) अर्जित कर बाजार में बेच सकती हैं।
    • इस योजना में जारी किया जाने वाला प्रत्येक कार्बन क्रेडिट सर्टिफिकेट (CCC) वायुमंडल से 1 टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य (tCO₂e) की कमी को दर्शाता है।
  • उपलब्धियां: वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026 के दौरान कुल 9 प्रमुख ऊर्जा-गहन क्षेत्रों के लगभग 490 औद्योगिक प्रतिष्ठानों को इसके अनुपालन दायरे में सफलतापूर्वक शामिल कर लिया गया।
    • ब्रिटेन के वित्त मंत्रालय (HM Treasury) ने आधिकारिक तौर पर भारत की सीसीटीएस (CCTS) को अपने आगामी सीमा कर नियमों के तहत ‘योग्य विदेशी कार्बन मूल्य निर्धारण योजना’ (Qualifying Overseas Carbon Pricing Scheme) के रूप में शामिल कर लिया. इससे:
  • दोहरे टैक्स से मुक्ति (Avoiding Double Taxation): ब्रिटेन का यूके सीबीएएम (UK CBAM) कानून 1 जनवरी 2027 से लागू होने जा रहा है। इस मान्यता के बाद, जिन भारतीय माल (जैसे लोहा, स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट) पर भारत में पहले ही CCTS के तहत कार्बन मूल्य चुकाया जा चुका है, उन्हें ब्रिटेन की सीमा पर उतनी राशि की टैक्स छूट (Carbon Price Relief UK) मिलेगी।
  • प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखना: टैक्स का बोझ कम होने से (Lower Carbon Tax Liability) भारतीय उत्पाद ब्रिटिश बाजारों में प्रतिस्पर्धी बने रहेंगे, जिससे द्विपक्षीय व्यापार (Trade Value) सुरक्षित रहेगा।

ब्रिटेन का कार्बन प्रोग्राम CBAM क्या है?

  • परिचय: UK Carbon Border Adjustment Mechanism – यूके कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म ब्रिटेन द्वारा आयातित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला एक सीमा कर (Border Tax) ढांचा है।
    • इसका मुख्य उद्देश्य ‘कार्बन रिसाव’ (Carbon Leakage) को रोकना और विदेशी सामानों पर उतना ही कार्बन मूल्य लगाना है, जितना ब्रिटेन के घरेलू निर्माता चुकाते हैं।
    • इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशों से आने वाले सस्ते और उच्च-कार्बन उत्सर्जक उत्पाद ब्रिटेन के घरेलू उद्योगों को नुकसान न पहुँचाएं, जो पहले से ही सख्त घरेलू कार्बन टैक्स (UK ETS) का सामना कर रहे हैं।
  • दायरा: यह प्रारंभिक रूप से एल्युमीनियम, सीमेंट, उर्वरक, हाइड्रोजन, लोहा और स्टील, चीनी मिट्टी (Ceramics) तथा ग्लास जैसे अत्यधिक कार्बन-गहन क्षेत्रों पर लागू होगा।
  • कार्यप्रणाली: यूके में इन वस्तुओं का आयात करने वाले आयातकों को उत्पाद की मैन्युफैक्चरिंग में उत्सर्जित हुई कार्बन की मात्रा (Embedded Emissions) का हिसाब देना होगा। यूके के कार्बन मूल्य (UK ETS) और मूल देश में चुकाए गए कार्बन टैक्स के अंतर के बराबर बॉर्डर पर टैक्स वसूला जाएगा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS) क्या है?

    यह भारत का एक बाजार-आधारित तंत्र है, जो उद्योगों के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन पर मूल्य निर्धारित कर हस्तांतरणीय कार्बन क्रेडिट प्रमाण पत्र जारी करता है।

  2. यूके सीबीएएम (UK CBAM) मान्यता से भारतीय निर्यातकों को क्या लाभ मिलेगा?

    भारतीय निर्यातक (Indian Exporters) ब्रिटेन को माल भेजते समय भारत में चुकाए गए कार्बन मूल्य के एवज में सीमा कर में आनुपातिक छूट (Carbon Price Relief) प्राप्त कर सकेंगे।

  3. ब्रिटेन का कार्बन बॉर्डर टैक्स (UK CBAM) कब से प्रभावी हो रहा है?

    यूनाइटेड किंगडम का यह नया पर्यावरण व्यापार नियम आधिकारिक तौर पर 1 जनवरी 2027 से पूरी तरह प्रभावी होने जा रहा है।

  4. भारत की सीसीटीएस योजना के तहत प्रत्येक प्रमाण पत्र का मूल्य क्या है?

    इस योजना में जारी किया जाने वाला प्रत्येक कार्बन क्रेडिट सर्टिफिकेट (CCC) वायुमंडल से 1 टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य (tCO₂e) की कमी को दर्शाता है।

  5. CCTS योजना को भारत में कौन सी संस्था संचालित करती है?

    नीतिगत स्तर पर इसे राष्ट्रीय संचालन समिति (NSCICM) तथा प्रशासनिक स्तर पर ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) द्वारा संचालित किया जाता है।

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