(Pradhan Mantri Mudra Yojana)प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

संदर्भ:
8 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) ने अपने सफल क्रियान्वयन के 11 वर्ष पूरे कर लिए हैं। 2015 में “फंडिंग द अनफंडेड” के विजन के साथ शुरू हुई यह योजना आज भारत के सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए वित्तीय समावेशन का सबसे बड़ा आधार स्तंभ बन चुकी है।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के बारे मे:
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत 8 अप्रैल 2015 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के “अनफंडेड” वर्ग, यानी वे छोटे उद्यमी जिनके पास बैंकिंग प्रणाली तक पहुंच नहीं थी, उन्हें औपचारिक ऋण जाल में लाना था।
- यह योजना MUDRA (Micro Units Development & Refinance Agency Ltd.) के माध्यम से संचालित होती है।
ऋण की श्रेणियाँ (Structure of Loans):
योजना को लाभार्थियों की विकास अवस्था और वित्तीय जरूरतों के आधार पर चार मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
- शिशु (Shishu): ₹50,000 तक का ऋण। यह सूक्ष्म व्यवसायों के शुरुआती चरण के लिए है।
- किशोर (Kishor): ₹50,000 से ₹5 लाख तक का ऋण। यह उन इकाइयों के लिए है जिन्होंने अपना व्यवसाय शुरू कर दिया है और विस्तार करना चाहती हैं।
- तरुण (Tarun): ₹5 लाख से ₹10 लाख तक का ऋण। यह स्थापित लघु व्यवसायों की बड़ी पूंजीगत आवश्यकताओं के लिए है।
- तरुण प्लस (Tarun Plus): ₹10 लाख से ₹20 लाख तक का ऋण। (बजट 2024-25 में शुरू किया गया, जो उन सफल उद्यमियों के लिए है जिन्होंने पिछले ऋणों का समय पर भुगतान किया है)।
प्रमुख विशेषताएं और लाभ:
- बिना गारंटी के ऋण (Collateral-Free): लाभार्थियों को ऋण प्राप्त करने के लिए कोई सुरक्षा या संपत्ति गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं होती।
- उद्देश्य: यह ऋण विनिर्माण, व्यापार, सेवा क्षेत्र और कृषि से जुड़ी गतिविधियों (जैसे डेयरी, मुर्गी पालन आदि) के लिए दिया जाता है।
- मुद्रा कार्ड: लाभार्थियों को एक डेबिट कार्ड दिया जाता है जिससे वे अपनी कार्यशील पूंजी (Working Capital) की जरूरतों के लिए एटीएम से नकद निकाल सकते हैं।
- प्रसंस्करण शुल्क: ‘शिशु’ ऋणों पर कोई प्रोसेसिंग फीस नहीं ली जाती।
- पात्रता: कोई भी भारतीय नागरिक जो गैर-कृषि, गैर-कॉर्पोरेट लघु व्यवसाय के लिए ऋण चाहता हो (जैसे दुकान, मैन्युफैक्चरिंग, कृषि-संबद्ध गतिविधियां)।
11 वर्षों की उपलब्धियां (Real-time Insights):
- वित्तीय समावेशन: अब तक 57.8 करोड़ से अधिक ऋण खाते खोले गए हैं, जिनमें ₹40.10 लाख करोड़ से अधिक की राशि वितरित की गई है।
- महिला सशक्तिकरण: लगभग 68% लाभार्थी महिलाएं हैं, जो भारत में महिला नेतृत्व वाले व्यवसायों में क्रांति ला रही हैं।
- सामाजिक न्याय: कुल वितरित ऋणों में से 51% से अधिक ऋण SC, ST और OBC समुदायों को दिए गए हैं।
- रोजगार सृजन: एक स्वतंत्र सर्वेक्षण के अनुसार, मुद्रा योजना ने देश में 12 करोड़ से अधिक नए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने में मदद की है।
- राज्यों का प्रदर्शन: ऋण वितरण में उत्तर प्रदेश (₹58,111 करोड़) शीर्ष पर है, उसके बाद बिहार और महाराष्ट्र का स्थान है।
- औसत ऋण आकार में वृद्धि: औसत ऋण आकार FY2016 में ₹38,000 से बढ़कर FY2026 में ₹1.25 लाख हो गया है, जो व्यवसायों के विस्तार (Scaling up) को दर्शाता है।
चुनौतियां:
- NPAs की समस्या: मार्च 2025 तक मुद्रा ऋणों में NPA (गैर-निष्पादित संपत्ति) की दर बढ़कर 9.81% हो गई है, जो MSME औसत (3.6%) से काफी अधिक है।
- शिशु ऋणों की अधिकता: लगभग 80% ऋण अभी भी ‘शिशु’ श्रेणी के हैं, जिससे बड़े स्तर पर रोजगार सृजन की क्षमता सीमित हो जाती है।
- मजूरी में बाधाएं: लगभग 30% आवेदन अपर्याप्त दस्तावेजों या क्रेडिट हिस्ट्री की कमी के कारण खारिज हो जाते हैं।