भारत-वियतनाम ब्रह्मोस मिसाइल समझौता

संदर्भ:
हाल ही में सिंगापुर में आयोजित शंग्री-ला डायलॉग (Shangri-La Dialogue) के दौरान भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि भारत ने वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल आपूर्ति के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
समझौते के मुख्य विशेषताएं:
- कुल मूल्य और पैकेज: यह रक्षा सौदा लगभग $629 मिलियन का है, जिसमें तटीय रक्षा मिसाइल बैटरी (Coastal Defence Missile Batteries), मिसाइलों का प्रारंभिक बैच, प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक्स सहायता शामिल है।
- आसियान (ASEAN) में विस्तार: फिलीपींस ($375 मिलियन, 2022) के बाद वियतनाम ब्रह्मोस खरीदने वाला दूसरा आसियान देश बन गया है, जबकि इंडोनेशिया के साथ बातचीत अंतिम चरण में है।
महत्व:
- चीन के प्रति आक्रामक संतुलन (Countering China): दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता के बीच यह सौदा वियतनाम को एक मजबूत रक्षा कवच प्रदान करता है। भारत ने इसके जरिए चीन के ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ के जवाब में अपनी विश्वसनीय उपस्थिति दर्ज कराई है।
- विश्वसनीय रक्षा भागीदार के रूप में उदय: यह सौदा दिखाता है कि भारत अब केवल हथियारों का आयातक नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मित्र देशों को उन्नत तकनीक साझा करने वाला एक ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ बन रहा है।
- व्यापक रणनीतिक साझेदारी (CSP): दोनों देशों के बीच संबंध 2016 से ही व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर हैं। यह मिसाइल सौदा सैन्य सहयोग (रक्षा साख, संयुक्त अभ्यास और क्षमता निर्माण) को नई ऊंचाई देगा।
- समुद्री सुरक्षा: दोनों देश ‘नेविगेशन की स्वतंत्रता’ और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) का समर्थन करते हैं। वियतनाम को ब्रह्मोस मिलने से मलक्का जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर में शक्ति संतुलन बना रहेगा।
- रक्षा निर्यात लक्ष्यों की प्राप्ति: वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ तक पहुंच गया है। यह सौदा वर्ष 2029-30 तक ₹50,000 करोड़ के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा।
- ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा: ब्रह्मोस का सफल निर्यात घरेलू निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (Defence Ecosystem) की वैश्विक विश्वसनीयता को प्रमाणित करता है।
ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली:
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प्रकार |
सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (Supersonic Cruise Missile) |
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संयुक्त उद्यम |
भारत (DRDO) और रूस (NPO Mashinostroyeniya) – 50:50 हिस्सेदारी |
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नामकरण |
भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर |
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गति |
लगभग मैक 2.8 से 3.0 (ध्वनि की गति से तीन गुना तेज) |
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प्लेटफ़ॉर्म |
जमीन, समुद्र, उप-समुद्र और हवा (Multi-platform) से लॉन्च संभव |
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सिद्धांत |
‘दागो और भूल जाओ’ (Fire and Forget) तकनीक पर आधारित |
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निर्यात रेंज |
मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) के नियमों के तहत निर्यात संस्करण की रेंज 290 किमी तक सीमित है। |