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RoSCTL योजना

RoSCTL Scheme

RoSCTL Scheme

संदर्भ:

हाल ही में कपड़ा मंत्रालय ने भारतीय वस्त्र उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाए रखने के लिए RoSCTL (Rebate of State and Central Taxes and Levies) योजना को 30 सितंबर 2026 तक विस्तार देने की घोषणा की है। 

  • यह कदम वैश्विक बाजार में वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धियों के बीच भारतीय निर्यातकों, विशेषकर MSME क्षेत्र को सशक्त बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। 

RoSCTL योजना क्या है?

RoSCTL (Rebate of State and Central Taxes and Levies) योजना भारतीय कपड़ा क्षेत्र, विशेष रूप से तैयार कपड़ों (Apparel) और मेड-अप्स (जैसे बेडशीट, तौलिये) के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई एक प्रमुख प्रोत्साहन योजना है।

  • शुरुआत: यह योजना 7 मार्च 2019 को कपड़ा मंत्रालय द्वारा शुरू की गई थी।
  • उद्देश्य: इसका मुख्य सिद्धांत “शून्य-रेटेड निर्यात” (Zero-rating of exports) है। इसका अर्थ है कि निर्यात किए जाने वाले उत्पादों में अंतर्निहित उन करों की वापसी करना जो GST रिफंड के दायरे में नहीं आते हैं।

योजना की मुख्य विशेषताएं: 

  • कवरेज: यह योजना मुख्य रूप से परिधान (Apparel) और मेड-अप्स (Made-ups) (जैसे पर्दे, चादर, तौलिया आदि) के निर्यात पर लागू होती है, जो ITC (HS) वर्गीकरण के अध्याय 61, 62 और 63 के अंतर्गत आते हैं। 
  • कार्यान्वयन: इसे राजस्व विभाग (वित्त मंत्रालय) द्वारा पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से लागू किया जाता है।
    • लाभ का स्वरूप: रिफंड सीधे नकद में नहीं, बल्कि ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स (Duty Credit Scrips) के रूप में मिलता है। इन स्क्रिप्स का उपयोग मूल सीमा शुल्क (Basic Customs Duty) के भुगतान के लिए किया जा सकता है।
      • ये स्क्रिप्स हस्तांतरणीय (Transferable) होती हैं, यानी निर्यातक इन्हें दूसरों को बेचकर नकद प्राप्त कर सकते हैं।
  • वापस किए जाने वाले कर: RoSCTL उन छिपे हुए करों की भरपाई करती है जो पहले निर्यातकों की लागत बढ़ा देते थे:
  • राज्य स्तर पर: परिवहन ईंधन पर VAT, मंडी कर, बिजली शुल्क, और कच्चे कपास के इनपुट पर एम्बेडेड SGST।
  • केंद्रीय स्तर पर: परिवहन ईंधन पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क, बिजली उत्पादन में कोयले पर लगा मुआवजा उपकर (Cess), और कीटनाशकों/उर्वरकों पर एम्बेडेड CGST।

योजना का महत्व:

  • लागत में कमी: निर्यातकों को लगभग 2% से 4.5% तक का अतिरिक्त लाभ मिलता है, जिससे उनका प्रॉफिट मार्जिन बेहतर होता है।
  • MSME क्षेत्र: कपड़ा क्षेत्र भारत में कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है। क्षेत्र के अधिकांश निर्यातक MSME श्रेणी में आते हैं, जिनके लिए नकद प्रवाह (Cash Flow) बनाए रखने में यह योजना महत्वपूर्ण है।
  • रोजगार: कपड़ा उद्योग भारत में श्रम-प्रधान (Labour-intensive) है। यह योजना लाखों श्रमिकों, विशेषकर ग्रामीण महिलाओं के रोजगार को सुरक्षित करने में मदद करती है।
  • निर्यात लक्ष्य: भारत ने 2030 तक $100 बिलियन के वस्त्र निर्यात और $250 बिलियन के कुल उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जिसमें RoSCTL एक प्रमुख स्तंभ है। 

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