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बर्फीले उल्लू को यूएन कन्वेंशन के तहत वैश्विक संरक्षण दर्जा

Snowy Owl global conservation status under the UN Convention

Snowy Owl global conservation status under the UN Convention

संदर्भ:

हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र के वन्यजीव संरक्षण सम्मेलन (CMS COP15) में बर्फानी उल्लू (Snowy Owl) को वैश्विक संरक्षण सूची में शामिल कर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। 

CMS COP15 का निर्णय:

  • प्रस्ताव: इसके संरक्षण का प्रस्ताव मुख्य रूप से नॉर्वे द्वारा रखा गया था।
  • संरक्षण: ब्राजील के कैम्पो ग्रांडे में आयोजित माइग्रेटरी स्पीशीज कन्वेंशन (CMS) के 15वें पक्षकारों के सम्मेलन (COP15) में बर्फानी उल्लू को वैश्विक सुरक्षा प्रदान की गई। इस सम्मेलन में कुल 40 नई प्रजातियों को संरक्षण के दायरे में लाया गया है। 
  • सुरक्षा का स्तर: इसे CMS की परिशिष्ट-I (Appendix I) में शामिल किया गया है, जिसका अर्थ है कि यह प्रजाति अब “विलुप्ति के खतरे” वाले जानवरों की श्रेणी में है और सदस्य देशों के लिए इसके शिकार पर कड़ा प्रतिबंध अनिवार्य है।

बर्फानी उल्लू के बारे मे:

  • वैज्ञानिक नाम: Bubo scandiacus
  • प्राकृतिक आवास: यह मुख्य रूप से आर्कटिक टुंड्रा क्षेत्रों (उत्तरी अमेरिका और यूरेशिया) में पाया जाता है।
  • विशेष व्यवहार: अन्य उल्लुओं के विपरीत, यह पूरी तरह से रात्रिचर नहीं है। यह दिन और रात दोनों समय सक्रिय रहता है, जो आर्कटिक की 24 घंटे की धूप के अनुकूलन का परिणाम है।
  • आहार: इनका मुख्य भोजन लेमिंग्स (lemmings) और वोल्ट्स जैसे छोटे स्तनधारी जीव हैं।
  • प्रजनन: यह एक खानाबदोश (Nomadic) शिकारी है जो भोजन की उपलब्धता के आधार पर अपना स्थान बदलता रहता है। 
  • संरक्षण स्थिति: यह IUCN रेड लिस्ट में ‘सुभेद्य’ (Vulnerable) श्रेणी में सूचीबद्ध है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन दशकों में इनकी आबादी में लगभग एक-तिहाई की कमी आई है।
  • क्षेत्रीय विलुप्ति: स्वीडन ने आधिकारिक तौर पर इसे क्षेत्रीय रूप से विलुप्त (Regionally Extinct) घोषित कर दिया है, जो इसके संकट की गंभीरता को दर्शाता है।
  • खतरे आर्कटिक का तापमान वैश्विक औसत से चार गुना तेजी से बढ़ रहा है। इससे बर्फ पिघल रही है और लेमिंग्स जैसे शिकार की आबादी में गिरावट आ रही है, जो सीधे उल्लुओं के प्रजनन को प्रभावित करती है।

  • प्राकृतिक आवास का विनाश: मानवीय बुनियादी ढांचे (सड़कें, बिजली की लाइनें) के निर्माण से इनके घोंसले बनाने के स्थानों में कमी आई है।
  • शिकार और अवैध व्यापार: सजावटी वस्तुओं (Taxidermy) के लिए इनका अवैध शिकार अभी भी एक चुनौती है। 

बर्फानी उल्लू को शामिल करने का महत्व:

  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: चूंकि ये पक्षी सीमाओं के पार प्रवास करते हैं, इसलिए अब सदस्य देश इनके माइग्रेटरी रूट्स (प्रवास मार्गों) की रक्षा के लिए कानूनी रूप से बाध्य होंगे।
  • पारिस्थितिकी तंत्र का संकेतक: बर्फानी उल्लू आर्कटिक पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का एक प्रमुख संकेतक है। इसका संरक्षण पूरे आर्कटिक जैव विविधता को बचाने की दिशा में एक कदम है।
  • कन्वेंशन ऑन माइग्रेटरी स्पीशीज (CMS), जिसे ‘बॉन कन्वेंशन’ (1979) भी कहा जाता है, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के तहत एक अंतर-सरकारी संधि है।
  • भारत CMS का सदस्य है और 2020 में COP13 की मेजबानी कर चुका है।

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