WMO State of the Global Climate 2025 report
संदर्भ:
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने हाल ही में ‘State of the Global Climate 2025’ रिपोर्ट जारी की है, जिसमें वैश्विक जलवायु संकट की भयावहता को रेखांकित किया गया है।
स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट 2025 रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:
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- हॉटैस्ट पीरियड: रिपोर्ट पुष्टि करती है कि 2015-2025 अब तक का सबसे गर्म 11-वर्षीय काल रहा है।
- वर्ष 2025 की स्थिति: 2025 रिकॉर्ड पर दूसरा सबसे गर्म वर्ष रहा, जिसका तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर (1850-1900) से 1.43 ± 0.13 °C अधिक दर्ज किया गया।
- पेरिस समझौता: 2024 पहला ऐसा पूर्ण वर्ष था जिसने 1.5°C की सीमा को पार किया। 2025-2029 के बीच कम से कम एक वर्ष के 1.5°C से अधिक होने की 86% संभावना है।
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जलवायु संकेतक (Climate Indicators): WMO ने पहली बार ‘पृथ्वी का ऊर्जा असंतुलन’ (Earth’s Energy Imbalance – EEI) को एक प्रमुख संकेतक के रूप में शामिल किया है।
- ग्रीनहाउस गैसें (GHG): CO2, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड की सांद्रता रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है। 2024 में CO2 का स्तर 423.9 ppm दर्ज किया गया, जो पूर्व-औद्योगिक काल से 53% अधिक है।
- महासागरीय ऊष्मा (Ocean Heat): समुद्र के ऊपरी 2000 मीटर में ऊष्मा की मात्रा 2025 में नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई। लगभग 90% अतिरिक्त ऊष्मा महासागरों द्वारा अवशोषित की जा रही है।
- समुद्र स्तर में वृद्धि (Sea-level Rise): 1993-2002 के बीच समुद्र स्तर 2.1 मिमी/वर्ष की दर से बढ़ रहा था, जो 2016-2025 के दौरान बढ़कर 4.1 मिमी/वर्ष हो गया है।
चरम घटनाएँ:
- ग्लेशियर और समुद्री बर्फ: आर्कटिक समुद्री बर्फ का अधिकतम विस्तार मार्च 2025 में रिकॉर्ड पर सबसे कम रहा। 2023-24 में वैश्विक ग्लेशियरों ने 450 गीगाटन बर्फ खोई, जो 1950 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है।
- चरम मौसम: अफ्रीका और एशिया में विनाशकारी बाढ़, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में जंगलों की आग (Wildfires), और दुनिया भर में जानलेवा लू (Heatwaves) देखी गई।
दक्षिण एशिया के लिए निहितार्थ:
- वर्षा का पैटर्न: दक्षिण एशिया में औसत से अधिक वर्षा होने की संभावना है, लेकिन मौसमी परिवर्तनशीलता कृषि योजना को जटिल बनाएगी।
- समुद्र स्तर: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में समुद्र का स्तर वैश्विक औसत (3.4 मिमी) से अधिक तेजी से (~4.0 मिमी/वर्ष) बढ़ रहा है, जिससे मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे तटीय शहर खतरे में हैं।
- हिमालयी ग्लेशियर: ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) का जोखिम बढ़ गया है।
नीतिगत अनुशंसाएँ:
- NDC अपडेट: देशों को 2025 तक अधिक सशक्त ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (NDCs) प्रस्तुत करने की आवश्यकता है।
- Early Warning Systems: संयुक्त राष्ट्र की ‘Early Warnings for All’ पहल के तहत 2027 तक सभी देशों को बहु-खतरा प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों से कवर करने का लक्ष्य है। वर्तमान में 40% देशों के पास यह सुविधा नहीं है। इसे गति देने की आवश्यकता है।
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विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO):
प्रमुख कार्य:
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